Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर रंगीन रत्नों और तैयार आभूषणों के लिए दुनियाभर में पहचानी जाती है. यहां से हर साल करीब 18,000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है. पर्यटन के बाद यह राज्य का सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा अर्जक क्षेत्र माना जाता है. इस उद्योग से लगभग चार लाख कारीगर और श्रमिक जुड़े हुए हैं जिनकी रोज़ी रोटी इसी पर निर्भर है.
हाथों की कारीगरी ही है असली पहचान
जयपुर के ज्वेलरी बाजार की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारंपरिक कारीगरी है. आज भी कई कारीगर रंगीन रत्नों को हाथों से तराशते और पॉलिश करते हैं. यही हुनर जयपुर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान देता है और विदेशी खरीदारों को आकर्षित करता है.
अमेरिकी टैरिफ से लगा बड़ा झटका
पिछले साल अगस्त में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ ने इस उद्योग को गहरी चोट पहुंचाई. खासतौर पर क्रिसमस सीज़न से पहले टैरिफ लागू होने से बड़े पैमाने पर ऑर्डर रद्द हो गए. इसका नतीजा यह रहा कि रत्न और आभूषणों के निर्यात में करीब 44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
अमेरिकी बाजार पर निर्भरता बनी कमजोरी
उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार कुल 18,000 करोड़ रुपये के निर्यात में से लगभग 3,200 करोड़ रुपये केवल अमेरिका से आते थे. ऐसे में टैरिफ का असर बेहद गंभीर रहा. कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे निर्यातकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा.
कीमतों के उतार चढ़ाव ने बढ़ाई मुश्किल
इस दौरान चांदी और सोने की कीमतों में तेज़ उतार चढ़ाव ने हालात को और कठिन बना दिया. रत्न तराशने और आभूषण तैयार करने से जुड़े लोगों के लिए यह साल संघर्ष भरा रहा.
नए व्यापार समझौतों से जगी नई उम्मीद
अब भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौतों को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है. निर्यातकों को भरोसा है कि इससे टैरिफ की बाधाएं कम होंगी और ऑर्डर फिर से बढ़ेंगे.
नए बाजार खोल रहे हैं रास्ते
अमेरिका के साथ साथ अब यूरोप ऑस्ट्रेलिया और यूएई जैसे बाजारों में भी भारतीय आभूषणों की मांग बढ़ रही है. इससे जयपुर का ज्वेलरी उद्योग फिर से मजबूती की ओर बढ़ता नजर आ रहा है.
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