पंचायत भवन निर्माण में घोटाला मिलने पर मंत्री मदन दिलावर का एक्शन, एईएन सस्पेंड और जेटीए को हटाया

राजस्थान में जयपुर की मोजमाबाद पंचायत समिति भवन में गंभीर निर्माण अनियमितताएं सामने आई हैं. जिसमें तुरंत कार्रवाई करते हुए जेटीए को हटाया गया और एईएन को निलंबित कर जांच के आदेश जारी किए गए.

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मसन दिलवार

Rajasthan News: राजस्थान में जयपुर जिले की नई पंचायत समिति में करोड़ों के प्रोजेक्ट पर सवालराजस्थान के जयपुर जिले में बनी नई मोजमाबाद पंचायत समिति के भवन निर्माण में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं. शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट (जेटीए) को काम से हटा दिया है.

साथ ही असिस्टेंट इंजीनियर (एईएन) शैलेंद्र मीणा को सस्पेंड कर दिया और उनके खिलाफ 16 सीसीए की जांच शुरू करने के आदेश दिए. यह फैसला पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता मुकेश महेश्वरी की रिपोर्ट पर लिया गया जिन्होंने 5 दिसंबर को साइट का दौरा किया था.

निर्माण में हर तरफ लापरवाही

निरीक्षण के दौरान मुकेश महेश्वरी को कई गंभीर खामियां मिलीं. भवन के कॉलम 1 से 1.5 इंच तक टेढ़े-मेढ़े पाए गए जो ड्राइंग से बाहर थे. प्लिंथ बीम जैसे पीबी-01, पीबी-30, पीबी-26, पीबी-31, पीबी-40 की चौड़ाई 12 इंच की बजाय 10 से 11 इंच ही थी. भवन की पिछली दीवार पर प्लिंथ की ऊंचाई 12 इंच के बजाय सिर्फ 10 इंच बनी. सीढ़ियों के लिए प्लिंथ बीम में एक्स्ट्रा सरिया नहीं छोड़े गए जिससे आगे की स्लैब जोड़ना मुश्किल होगा. 

खरंजा की मोटाई 6 इंच की जगह 3 से 5 इंच तक थी और पत्थरों को सही बॉन्डिंग में नहीं बिछाया गया बल्कि बेतरतीब ढंग से डाल दिया. कई कॉलमों में कोई रिंग नहीं लगाई गई और सीढ़ियों की फ्लाइट बनाने के लिए सरिया बाहर नहीं निकाले गए. जेटीए की क्वालिटी चेक करने की क्षमता पर भी सवाल उठे जिसके चलते उन्हें तुरंत हटाने और कुशल जेटीए की निगरानी में काम कराने के निर्देश दिए गए.

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एमबी नहीं भरी, स्टाफ की लापरवाही उजागर

वर्तमान में भवन प्लिंथ लेवल पर है लेकिन मेजरमेंट बुक (एमबी) अभी तक नहीं भरी गई. जेटीए ने बताया कि एईएन ने प्लिंथ के बाद एमबी भरने को कहा था. जेटीए ने एक रजिस्टर में माप रखने की बात कही लेकिन चार असिस्टेंट इंजीनियर बदलने से कोई ठोस गाइडेंस नहीं मिला जिससे रिकॉर्ड रखना मुश्किल हो रहा.

अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने काम रोकने और सभी जिम्मेदारों को हटाने के बाद ही आगे बढ़ने के आदेश दिए. मौके पर एईएन शैलेंद्र मीणा सूचना के बावजूद नहीं आए और फोन पर भी कोई जवाब नहीं दिया. वे विकास अधिकारी के साथ एईएन का काम भी देख रहे थे लेकिन जानबूझकर निरीक्षण से गायब रहे.

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अधिकारी की पुरानी करतूतें भी आईं सामने 

शैलेंद्र मीणा की कार्यशैली पहले से विवादित रही है. करौली जिले की टोडाभीम पंचायत समिति में उन्होंने दो ग्रेवल सड़कों को 500 और 600 मीटर की बजाय 2500 मीटर दिखाकर 5 लाख रुपये की धांधली की. माप पुस्तिका नंबर 105 में दर्ज 100 कार्यों में से ज्यादातर साइट पर नहीं मिले. इस घोटाले ने राजकोष को बड़ा नुकसान पहुंचाया. मंत्री मदन दिलावर के इस सख्त कदम से उम्मीद है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी.

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