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This Article is From Feb 19, 2026

Rajasthan: भारी रॉयल्टी और GST से बेदम हुआ जैसलमेर का ‘येलो गोल्ड’, क्या कहते हैं स्थानीय व्यापारी ?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रॉयल्टी दरों को तर्कसंगत नहीं बनाया गया, तो जैसलमेर का ‘पीला सोना’ इतिहास बनकर रह जाएगा. इस उद्योग पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका भी संकट में पड़ती नजर आ रही है.

Rajasthan: भारी रॉयल्टी और GST से बेदम हुआ जैसलमेर का ‘येलो गोल्ड’, क्या कहते हैं स्थानीय व्यापारी ?
व्यापारियों का कहना है कि बढ़ते टैक्स बोझ ने इस पारंपरिक उद्योग को कमजोर कर दिया है.

Jaisalmer News: दुनिया भर में अपनी सुनहरी आभा के लिए प्रसिद्ध जैसलमेर का पीला पत्थर, जिसे ‘येलो गोल्ड' कहा जाता है, आज गंभीर संकट से गुजर रहा है. कभी सैकड़ों खदानों में गूंजने वाली मशीनों की आवाज अब धीरे-धीरे खामोशी में बदलती जा रही है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकारी नीतियों और बढ़ते टैक्स बोझ ने इस पारंपरिक उद्योग को कमजोर कर दिया है.

जानकारों के अनुसार जैसलमेर के पत्थर उद्योग के संकट की सबसे बड़ी वजह इसे ‘मार्बल' श्रेणी में रखा जाना है. भू-वैज्ञानिक दृष्टि से यह पत्थर मार्बल नहीं बल्कि चूना पत्थर (लाइम स्टोन) है, फिर भी सरकार मार्बल की तरह ही सख्त नियम और भारी रॉयल्टी लागू कर रही है. खास बात यह है कि जहां मकराना मार्बल का भंडार सैकड़ों फीट गहरा है, वहीं जैसलमेर के पत्थर का डिपॉजिट केवल करीब 20 फीट तक ही सीमित है.

''भारी रॉयल्टी और GST ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया''

उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि कम डिपॉजिट के कारण यहां खनन लागत पहले ही अधिक आती है. इसके ऊपर भारी रॉयल्टी और GST ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है. नतीजतन कई खदानें बंद हो चुकी हैं और बाकी भी बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं.

स्थानीय पत्थर व्यवसायी सिकंदर मिर्ज़ा ने बताया कि लंबे समय से सरकार से नियमों में बदलाव की मांग की जा रही है. उनका कहना है कि मकराना मार्बल और जैसलमेर के पत्थर की परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं, लेकिन दोनों पर समान नियम लागू होने से व्यापार घाटे में चला गया है और खदान संचालकों के लिए काम जारी रखना मुश्किल हो गया है.

''येलो स्टोन उद्योग को बचाने के लिए नीतिगत सुधार जरूरी''

रिको एसोसिएशन के सचिव गिरीश व्यास ने भी चिंता जताते हुए कहा कि येलो स्टोन उद्योग को बचाने के लिए नीतिगत सुधार जरूरी हैं. उनके अनुसार यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी तो हजारों लोगों को रोजगार देने वाला यह उद्योग पूरी तरह समाप्त हो सकता है. उन्होंने सरकार से टैक्स और रॉयल्टी दरों पर पुनर्विचार करने की मांग की है. लगातार बंद होती खदानें इस उद्योग के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही हैं.

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