Rajasthan: "देश की रक्षा के लिए पापा हुए शहीद," सुरेंद्र की बेटी बोली- मैं फौजी बनकर पिता का बदला लूंगी

Jhunjhunu News: पाकिस्तानी हमले में झुंझुनू के सपूत शहीद सुरेन्द्र कुमार की शहादत पर पूरा देश शोक में है. उनकी 11 साल की बेटी वर्तिका ने सेना में भर्ती होकर दुश्मनों के दांत खट्टे करने और अपने पिता की शहादत का बदला लेने की बात कही है.

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शहीद सुरेंद्र कुमार की बेटी वर्तिका ( बाएं)
NDTV

Shaheed Surendra kumara Last rites: पाकिस्तान हमले में शहीद हुए सुरेंद्र मोगा का पार्थिव शरीर आज (रविवार) झुंझुनू पहुंच गया है. यहां से शहीद का पार्थिव शरीर तिरंगा यात्रा के साथ उनके गांव मेहरादासी पहुंचेगा. जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से हो रहे हमलों में वे शहीद जम्मू कश्मीर के उधमपुर में वह शहीद हो गए. वे उधमपुर के 39 विंग एयर बेस में मेडिकल असिस्टेंट सार्जेंट के पद पर तैनात थे.

पाकिस्तान का मिट जाना चाहिए नामोनिशान-शहीद की बेटी

शहीद सुरेंद्र कुमार मोगा की 11 साल की बेटी वर्तिका अपने पिता की शहादत पर बेहद दुखी है. उसे देश के लिए जान कुर्बान करने वाले अपने पिता पर गर्व भी है. उसने नम आंखों से पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उसे अपने पिता पर गर्व है, वह दुश्मनों का सफाया करते हुए शहीद हुए. पाकिस्तान का नामोनिशान भी मिट जाना चाहिए. 
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बड़ी होकर फौजी बनेगी और पिता की लेगी बदला- शहीद की बेटी

वर्तिका ने आगे कहा कि वह भी बड़ी होकर फौजी बनेगी और अपने पिता की मौत का बदला लेगी. हमले की पहली रात करीब 9 बजे उसकी अपने पिता से आखिरी बातचीत हुई थी. तब शहीद सुरेंद्र कुमार ने अपनी बेटी से कहा था कि ड्रोन उड़ रहे हैं लेकिन मैं सुरक्षित हूं. 

राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा शहीद का अंतिम  संस्कार 

शहीद का अंतिम संस्कार मंडावा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.राज्य सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत पुष्पचक्र अर्पित करेंगे. साथ ही डिप्टी सीएम समेत सरकार के चार मंत्री शामिल होंगे और शहीद को श्रद्धांजलि देंगे. इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा भी झुंझुनूं के सपूत की शहादत को नमन करने में शामिल होंगे.

15 अप्रैल को लौटे थे ड्यूटी पर

जानकारी के अनुसार, शहीद सुरेंद्र कुमार हाल ही में 15 अप्रैल को अपने परिवार के साथ ड्यूटी पर लौटे थे. वे अपने पीछे 8 साल की बेटी और 5 साल का बेटा छोड़ गए हैं. परिजनों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में गांव में नया मकान बनवाया था और कुछ दिन पहले ही गृह प्रवेश भी किया था. सुरेंद्र गांव में युवाओं को सेना की तैयारी के टिप्स देते थे और कई युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत थे.

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