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This Article is From Mar 11, 2026

जोधपुर में 'गैंगवार' नहीं, वेपन चेक करते वक्त हुआ था हादसा, मंगलदीप अपार्टमेंट के फ्लैट में चली थीं 5 गोलियां

Jodhpur Firing Truth: जोधपुर में सरेराह फायरिंग की खबर ने शहर को दहला दिया था, लेकिन जब पुलिस कमिश्नर की टीमों ने अस्पतालों और सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो कहानी कुछ और ही निकली.

जोधपुर में 'गैंगवार' नहीं, वेपन चेक करते वक्त हुआ था हादसा, मंगलदीप अपार्टमेंट के फ्लैट में चली थीं 5 गोलियां
डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल ने जोधपुर में हुई फायरिंग केस में बड़ा अपडेट दिया है.
NDTV Reporter

Rajasthan News: जोधपुर शहर में मंगलवार शाम को हुई फायरिंग की सनसनीखेज घटना का पुलिस ने मात्र 4 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है. जिसे पहले शताब्दी सर्कल के पास बदमाशों की फायरिंग माना जा रहा था, वह असल में पाल बालाजी मंदिर के सामने स्थित मंगलदीप अपार्टमेंट की चौथी मंजिल पर हुआ एक हादसा निकला. पुलिस कमिश्नर शरद कविराज के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों ने सीसीटीवी फुटेज और अस्पतालों की सघन जांच के बाद पूरी सच्चाई सामने ला दी है.

अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज से खुला राज

घटना की शुरुआत तब हुई जब घायल अनिल को जोधपुर एम्स लाया गया. पुलिस को पहले सूचना दी गई कि फायरिंग शताब्दी सर्कल के पास हुई है, लेकिन जांच में यह सूचना झूठी निकली. इसके बाद डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल और उनकी टीम ने निजी अस्पतालों और सीसीटीवी कैमरों की खाक छानी. आखिर में पुलिस को मंगलदीप अपार्टमेंट के एक फ्लैट में फायरिंग के निशान मिले, जिससे पूरी कहानी साफ हो गई.

हाथ से गिरते ही पिस्तौल से निकले 5 राउंड

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मंगलदीप अपार्टमेंट के एक कमरे में कुछ दोस्त बैठकर ऑटोमैटिक हथियार (Automatic Weapon) चेक कर रहे थे. इसी दौरान अचानक हथियार हाथ से नीचे गिर गया और उससे करीब पांच राउंड फायर हो गए. गोलियां दीवारों से टकराते हुए वहां मौजूद अनिल और छोटू सिंह को लग गईं. हादसे के बाद घबराए साथी दोनों घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में छोड़कर फरार हो गए थे.

दो अस्पतालों में भर्ती हैं घायल, वार्ड के बाहर पुलिस तैनात

घायल अनिल का इलाज एम्स में चल रहा है, वहीं दूसरे घायल छोटू सिंह को कई अस्पतालों से होते हुए अंततः डाली बाई मंदिर के पास स्थित त्रिनय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसका ऑपरेशन हुआ है. पुलिस को गुमराह करने के लिए साथियों ने निजी अस्पताल की सूचना पुलिस को नहीं दी थी, जिसे पुलिस ने देर रात ढूंढ निकाला. अब दोनों घायलों के वार्ड के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा है.

पुलिस की मुस्तैदी ने सुलझाई गुत्थी

इस पूरे मामले के खुलासे में कमिश्नर शरद कविराज के साथ डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल, डीसीपी ईस्ट पी. डी. नित्या और एसीपी छवि शर्मा सहित भारी पुलिस बल जुटा रहा. मौके पर एफएसएल (FSL) की टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए हैं और अब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि वह ऑटोमेटिक हथियार वहां कैसे आया और इसके पीछे असल मंशा क्या थी?

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