करौली में सफाई व्यवस्था पर बैठक में ही खुल गई प्रशासन की पोल, कागजों में साफ शहर; जमीन पर गंदगी का ढेर

राजस्थान के करौली में सफाई व्यवस्था की सच्चाई समीक्षा बैठक के दौरान सामने आ गई, जहां बड़े दावों के बीच गंदगी और अव्यवस्था ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए और सिस्टम की कमजोरियां उजागर हो गईं.

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राजस्थान के करौली में सफाई व्यवस्था की सच्चाई समीक्षा बैठक के दौरान सामने आ गई.

Rajasthan News: राजस्थान के करौली में स्वच्छता को लेकर किए जा रहे दावों की सच्चाई उस समय सामने आ गई जब स्वच्छ भारत मिशन शहरी के ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने जिले का दौरा किया. कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक में एक ओर सख्ती और चेतावनियां सुनाई दीं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हालात ने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया. शहर में फैली गंदगी, अधिकारियों की लापरवाही और जवाबदेही की कमी ने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए.

बैठक में सख्ती, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं?

कलेक्ट्रेट सभागार में नगर निकायों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा हुई. गुप्ता ने साफ कहा कि अगर सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जुर्माना 10 गुना तक बढ़ाया जाएगा. लेकिन बड़ा सवाल यही रहा कि जब हालात पहले से खराब हैं तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई. क्या प्रशासन सिर्फ बैठकों और चेतावनियों तक सीमित रह गया है.

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डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सिर्फ कागजों में

बैठक में दावा किया गया कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण से 65 प्रतिशत गंदगी खत्म की जा सकती है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. कई वार्डों में नियमित कचरा उठान नहीं हो रहा और गलियों में कचरे के ढेर लगे हैं. सुबह 10 बजे तक कचरा उठाने का निर्देश भी सिर्फ कागजों में ही नजर आता है.

कैला देवी की हालत ने बढ़ाई मुश्किल

कैला देवी कस्बे की स्थिति ने बैठक के दौरान प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया. जब ब्रांड एंबेसडर ने अधिकारियों से दौरे का समय पूछा तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया. इससे साफ हो गया कि अधिकारी खुद ही जमीनी स्थिति से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं.

जनता पर सख्ती

निजी संपत्तियों पर 3 दिन में सफाई नहीं करने पर 10 गुना जुर्माने की चेतावनी दी गई, लेकिन सरकारी स्तर पर फैली गंदगी और अव्यवस्था पर कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया. इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या नियम केवल आम जनता के लिए ही हैं.

टूटी सड़कें और लीकेज से परेशान लोग

शहर में सड़कों के गड्ढे और पाइपलाइन लीकेज जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं. बैठक में 7 से 15 दिन में सुधार के निर्देश दिए गए, लेकिन ऐसे निर्देश पहले भी दिए जाते रहे हैं जिनका असर जमीन पर बहुत कम दिखा है.

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