Rajasthan News: राजस्थान के राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण की किलकारियां सुनाई देने लगी. गोडावण संरक्षण ब्रीडिंग प्रोग्राम ने साल 2026 में बड़ी सफलता हासिल की है. चौथे ब्रीडिंग सीज़न के पहले ही महीने में 11 नए चूज़ों का जन्म रिकॉर्ड किया गया है, जिसे इस प्रोजेक्ट के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है.इस सीज़न का पहला चूज़ा 10 मार्च को हैच हुआ था.
कैप्टिव ब्रीडिंग से बढ़ रही है गोडावण की संख्या
बता दें कि इन 11 चूजों में से 3 चूजे नेचुरल मेटिंग से और 8 आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन (AI) तकनीक से तैयार किए गए हैं. 7 मादाओं के अंडों से सफल हैचिंग दर्ज हुई, जबकि 5 नर पक्षियों के सहयोग से प्रजनन प्रक्रिया को गति मिली है. कैप्टिव ब्रीडिंग के तहत गोडावण की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इसके चलते सम और रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की कुल संख्या 79 तक पहुंच गई है. साल 2019 से अब तक 33 संस्थापक पक्षियों को जंगली अंडों से लाकर सुरक्षित रखा गया, जिनसे अब तक 46 कैप्टिव-ब्रीड चूजे तैयार हो चुके हैं.
भविष्य में प्राकृतिक आवास में छोड़ने की जा रही है तैयारी
विशेषज्ञों के अनुसार यह कार्यक्रम तय समय से पहले ही रिलीज़ चरण की ओर बढ़ रहा है. गोडावण की घटती संख्या के बीच यह सफलता नई उम्मीद जगाती है. नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित प्रजनन से मिली इस उपलब्धि को संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, वहीं भविष्य में इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी भी की जा रही है.
#GIB conservation breeding program adds eleven captive-bred chicks in the first month of its fourth breeding season #2026, from eggs laid by 7 females and sired by 5 males. With 33 founder birds sourced from wild eggs and another 46 captive-bred chicks produced, since its… pic.twitter.com/NWsUxqfzX5
— Wildlife Institute of India (@wii_india) April 10, 2026
पर्यावरण प्रेमियों के चेहरे पर छाई मुस्कान
डेजर्ट नेशनल पार्क के अधिकारी बृजमोहन गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सफलता उम्मीद से कहीं बड़ी है.वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के एक्स अकाउंट पर इन्हें लेकर जानकारियां दी गई है. इन 11 नए चूजों के आने से अब ब्रीडिंग सेंटर में गोडावण की कुल संख्या 79 हो गई है. इन 11 में से 3 चूजे प्राकृतिक तरीके से, जबकि 8 चूजे AI तकनीक (कृत्रिम गर्भाधान) के जरिए पैदा हुए हैं. इस प्रोग्राम की शुरुआत 2019 में हुई थी. तब से अब तक 46 नए चूजे कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार किए जा चुके हैं. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह प्रोजेक्ट अपनी सफलता के उस पड़ाव पर पहुंच गया है, जहां जल्द ही इन पक्षियों को खुले आसमान और प्राकृतिक माहौल में छोड़ा जा सकेगा.
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