राजस्थान शिक्षा रैंकिंग में करौली बना नंबर-1, जयपुर-जोधपुर जैसे बड़े जिलों को छोड़ा पीछे

राजस्थान की फरवरी 2026 शिक्षा रैंकिंग में करौली जिला पहले स्थान पर पहुंच गया है. झुंझुनूं दूसरे और हनुमानगढ़ तीसरे नंबर पर रहे. सख्त मॉनिटरिंग, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और शिक्षकों की मेहनत को इस सफलता का मुख्य कारण माना जा रहा है.

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राजस्थान की फरवरी 2026 शिक्षा रैंकिंग में करौली जिला पहले स्थान पर पहुंच गया है.

Rajasthan News: राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है. स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी फरवरी 2026 की जिला शैक्षिक अकादमिक रैंकिंग में करौली ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. आमतौर पर विकास के पैमानों पर पीछे माने जाने वाला यह जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरा है.

ताजा रैंकिंग में झुंझुनूं दूसरे और हनुमानगढ़ तीसरे स्थान पर रहे. वहीं बड़े जिलों में गिने जाने वाले Jaipur और Jodhpur इस बार शीर्ष स्थानों से पीछे रह गए. रैंकिंग के निचले पायदान पर उदयपुर और बारां जैसे जिले रहे.

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हर महीने जारी होती है शिक्षा रैंकिंग

राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग हर महीने जिलों की शैक्षिक अकादमिक रैंकिंग जारी करता है. इसमें स्कूलों में पढ़ाई का स्तर, विद्यार्थियों का सीखने का स्तर और शिक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन किया जाता है. फरवरी 2026 की इस रैंकिंग में करौली जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल कर सभी को चौंका दिया.

रणनीति और मॉनिटरिंग बनी सफलता की कुंजी

जिला शिक्षा अधिकारी Indresh Sharma के अनुसार जिले में प्राथमिक स्तर से ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान दिया गया. कक्षा 3 से 7 तक के बच्चों के सीखने के स्तर पर लगातार फोकस रखा गया.

उन्होंने बताया कि District Institute of Education and Training के माध्यम से स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग की गई और शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. स्कूलों में एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग किट्स का अधिक उपयोग कराया गया जिससे बच्चों को गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई समझने में मदद मिली.

लापरवाही पर सख्ती भी बनी वजह

शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लापरवाही करने वाले शिक्षकों पर सख्ती भी की गई. अधिकारियों ने स्कूलों में कॉपियों और वर्कबुक की नियमित जांच के निर्देश दिए. निरीक्षण के दौरान निर्देशों की अनदेखी करने वाले स्टाफ को चार्जशीट भी दी गई जिससे शिक्षण व्यवस्था में सुधार देखने को मिला.

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किताबों की कमी के बावजूद नहीं रुकी पढ़ाई

सत्र की शुरुआत में कई स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की कमी सामने आई. इसके बावजूद शिक्षकों ने इंटरनेट से ई-बुक्स डाउनलोड कर उनके प्रिंट निकालकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी.

प्रदेश के लिए बना करौली मॉडल

शिक्षा विभाग के अनुसार करौली की सफलता यह दिखाती है कि सही योजना, सख्त मॉनिटरिंग और शिक्षकों की प्रतिबद्धता से सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव संभव है. अब विभाग इस मॉडल को अन्य जिलों में लागू करने की तैयारी कर रहा है ताकि पूरे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके.

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