करौली: 350 साल पुराने इस मंदिर में 200 वर्षों से जल रही अखंड ज्योति, आज से छठ मेला शुरू

करौली जिले के करणपुर में स्थित करणपुर वाली माता के मंदिर में छठ के पावन अवसर पर विशाल मेले की शुरुआत हो गई है. 350 साल पुराने इस मंदिर में श्रद्धा परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है.

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करणपुर वाली माता बीजासन माता.

Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले में स्थित प्रसिद्ध करणपुर वाली माता बीजासन माता के मंदिर में आज से भव्य मेले का शुभारंभ हो गया है. छठ के पावन पर्व पर लगने वाला यह मेला हर वर्ष श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बनता है. मंदिर करौली जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर पहाड़ियों के बीच स्थित है जहां देश के कोने कोने से भक्त माता के दर्शन को पहुंच रहे हैं.

350 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

करणपुर माता मंदिर का इतिहास करीब 350 वर्ष पुराना बताया जाता है. मान्यता है कि वर्ष 1713 में करौली रियासत के समय भक्त बलवीदा गौड़ माता की ज्योति को सवाई माधोपुर के इंद्रगढ़ से विधि विधान के साथ यहां लाए थे. तभी से यह स्थान क्षेत्र में गहरी आस्था का प्रतीक बना हुआ है. आज भी मंदिर में पुजारी परिवार की आठवीं पीढ़ी लगातार माता की सेवा में लगी हुई है.

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छठ के दिन खुलते हैं गर्भगृह के पट

मंदिर की सबसे खास परंपरा यह है कि साल में केवल छठ के दिन ही गर्भगृह के पट 24 घंटे खुले रहते हैं. इस दिन भक्त रातभर माता के दर्शन कर पाते हैं. मंदिर में पिछले 200 वर्षों से निरंतर जल रही अखंड ज्योति श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास की पहचान है. इतिहास में माता का विशेष श्रृंगार केवल एक बार किया गया था जो इस मंदिर को और भी विशिष्ट बनाता है.

प्रशासन ने किए पुख्ता इंतजाम

मेले में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है. करणपुर बस स्टैंड के पास निशुल्क वाहन पार्किंग की व्यवस्था की गई है. पुलिस बल की तैनाती लगातार निगरानी 24 घंटे बिजली और पेयजल आपूर्ति तथा धर्मशालाओं अटल सेवा केंद्र और तहसील परिसर में रुकने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है.

छठ की रात मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. माता के जयकारे लांगुरिया गीत ढोल और थाली की गूंज से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है. श्रद्धालु रातभर जागरण और भजन कीर्तन के माध्यम से माता से सुख शांति और मनोकामनाएं मांगते हैं.

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