करौली: 1832 हेक्टेयर भूमि पर बन रहे आयरन प्लांट का जोरदार विरोध, सड़कों पर उतरे हजारों ग्रामीण

राजस्थान में करौली जिले के हिण्डौन क्षेत्र में आयरन और खनिज खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया. 1832 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण से डेढ़ लाख लोगों पर असर पड़ने की आशंका है. 

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करौली में लोगों का प्रदर्शन.

Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले में हिण्डौन इलाके के ग्रामीण आयरन और खनिज खनन परियोजना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. लीलोटी, टोडूपुरा, देदरौली और खोहरा जैसे गांवों के लोग भूमि अधिग्रहण के प्रस्ताव से नाराज हैं. उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री तथा खनन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. ग्रामीणों की मांग है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया तुरंत रद्द की जाए, वरना आंदोलन और तेज होगा.

1832 हेक्टेयर भूमि पर संकट, डेढ़ लाख लोग प्रभावित

ग्रामीणों ने बताया कि हिण्डौन सिटी तहसीलदार के 9 दिसंबर 2025 के पत्र में आयरन प्लांट के लिए कई गांवों की जमीन अधिग्रहीत करने का प्रस्ताव है. इसमें देदरौली, सिंघानमीना, खेड़ा जमालपुर, कांचरौली, फुलवाड़ा, बुर्जावाड़ा, दूघाटी और चमरपुरा की करीब 684 हेक्टेयर भूमि शामिल है.

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इसके अलावा कारवाड़मीना, देदरौली, टोडूपुरा, मनेमा, फैलीकापुरा और जमालपुर की 233.06 हेक्टेयर, कोटरा ढहर, गांवड़ामीना, गुर्जरगांवड़ा, निमोड़ पट्टी, लीलोटी और कारवाड़मीना की 455.10 हेक्टेयर तथा खोहरा घुसेटी, खरेटा, बमनपुरा गुर्जर, दूघाटी और चमरपुरा की 459.75 हेक्टेयर भूमि का जिक्र है.

कुल मिलाकर 1832.83 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के घेरे में है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे डेढ़ लाख की आबादी पर असर पड़ेगा. ज्यादातर परिवार कृषि और जंगलों पर निर्भर हैं. जमीन छिनने से उनकी रोजी-रोटी और घर पर खतरा मंडरा रहा है.

जांच के नाम पर मशीनें लगाईं, आक्रोश बढ़ा

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाल ही में जांच के बहाने मशीनें लगाई गईं, जिससे इलाके में गुस्सा फैल गया. उन्होंने मशीनों को फौरन हटाने की मांग की और चेतावनी दी कि 15 दिन में अधिग्रहण बंद नहीं हुआ तो जनआंदोलन उग्र रूप ले सकता है.

इससे पहले कटकड़-टोडूपुरा मोड़ पर जनसभा हुई, जहां चार कंपनियों को दी गई 1850 हेक्टेयर भूमि के खिलाफ विरोध जताया गया. ग्रामीण वाहनों से मासलपुर चुंगी पहुंचे और वहां से कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा निकाली. नारेबाजी के बीच एनएच-23 पर धरना दिया, जिससे यातायात कुछ देर रुका.

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प्रशासन से वार्ता, आश्वासन मिला

प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने समझाइश की और प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना से बात की. कलेक्टर ने समस्याएं सुनकर ऊपरी स्तर तक पहुंचाने का वादा किया.

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