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पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में गरमाया EWS आरक्षण का मुद्दा, राजपूत समाज ने की 14% की मांग

श्री राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष ऋतुराज सिंह हाडा ने बताया कि बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इनमें सबसे प्रमुख था EWS आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 14% करने की मांग.

पंचायत चुनाव से पहले राजस्थान में गरमाया EWS आरक्षण का मुद्दा, राजपूत समाज ने की 14% की मांग
क्या राजपूत समाज बदल देगा पंचायत चुनाव का खेल?

Rajasthan News: राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनावों (Rajasthan Panchayat Election 2025) से पहले राजपूत समाज (Rajput Community) ने अपनी मांगों को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है. बारां (Baran) जिले में श्री राजपूत करणी सेना की एक महत्वपूर्ण बैठक (Shri Rajput Karni Sena Meeting) हुई, जिसमें समाज ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मिलने वाले आरक्षण (EWS Reservation) को बढ़ाने की मांग की. इस बैठक में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सिंह खिजुरी भी मौजूद रहे, जिन्होंने साफ संकेत दिए कि समाज अब अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाएगा.

पंचायत चुनाव से पहले मांगों का बहीखाता

पंचायत चुनाव से पहले हुई इस बैठक को राजनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है. समाज ने सिर्फ EWS आरक्षण बढ़ाने की मांग नहीं की, बल्कि सीधे तौर पर पंचायत चुनावों में भी EWS आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा है. इसका सीधा मतलब है कि समाज चाहता है कि ग्रामीण स्तर के चुनावों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रतिनिधित्व का मौका मिले.

श्री राजपूत करणी सेना के जिलाध्यक्ष ऋतुराज सिंह हाडा ने बताया कि बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. इनमें सबसे प्रमुख था EWS आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 14% करने की मांग. इसके साथ ही, केंद्र स्तर पर EWS आरक्षण में सरलीकरण लागू करने और पंचायती चुनावों में इसे लागू करने पर भी जोर दिया गया.

क्यों अहम हैं ये मांगें?

पंचायत चुनाव राजस्थान की राजनीति की नींव होते हैं. ग्रामीण इलाकों में होने वाले ये चुनाव बताते हैं कि गांवों में किस पार्टी का दबदबा है. अगर राजपूत समाज अपनी मांगों को लेकर एकजुट होता है और पंचायत चुनावों में EWS आरक्षण को मुद्दा बनाता है, तो इसका सीधा असर राजनीतिक पार्टियों पर पड़ेगा. राजपूत समाज राजस्थान में एक बड़ा और प्रभावी वोट बैंक है. अगर ये समाज एकजुट होकर किसी भी पार्टी के खिलाफ जाता है, तो उस पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है.

पंचायत चुनावों में EWS को लागू करने की मांग करके समाज सीधे ग्रामीण वोटरों को साधने की कोशिश कर रहा है. इससे न सिर्फ सरकार पर दबाव पड़ेगा, बल्कि स्थानीय नेताओं को भी इन मांगों पर ध्यान देना होगा. बैठक में अंता विधानसभा में होने वाले उपचुनाव पर भी चर्चा हुई. प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सिंह खिजुरी ने कहा कि राजपूत समाज को अंता विधानसभा चुनाव में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. इस तरह की मांगें अक्सर बड़े चुनावों से पहले उठती हैं और पंचायत चुनावों के साथ इनका सीधा संबंध देखा जाता है.

इतिहास और भविष्य की रणनीति

बैठक में NCERT की पुस्तकों में मराठा साम्राज्य के विस्तार संबंधी दर्ज तथ्यों पर भी आपत्ति जताई गई. खिजुरी ने कहा कि राजपूत समाज हमेशा से बलिदान के लिए जाना जाता है और अब वह अपनी मांगों को लेकर पूरे राजस्थान का दौरा कर रहे हैं. यह बताता है कि यह सिर्फ एक बैठक नहीं थी, बल्कि एक बड़े आंदोलन की शुरुआत है, जिसका असर आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में भी दिख सकता है. बैठक के बाद राजपूत छात्रावास परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया. जिलाध्यक्ष ऋतुराज सिंह हाडा ने बताया कि अजीत सिंह माथानी और उनकी टीम के प्रयासों से छात्रावास का भव्य निर्माण कार्य अंतिम चरण में है, जो समाज के लिए गर्व की बात है.

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