योग की इस 'चिन लॉक' तकनीक से थायरॉयड पर रहेगा कंट्रोल, जानें इसे करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

थायराइड जो बिगड़ी जीवनशैली के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों के शरीर में अपना घर बनाकर उन्हें दवाइयों का मोहताज बना रही है. इसे कंट्रोल में करने के लिए योग आपके लिए बेहतर होता है जिसमें लेकिन इसे शरीर से हटाने के लिए जालंधर बंध (चिन लॉक) योग की एक महत्वपूर्ण भूमिका है.

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 Jalandar Bandh yoga for thyroid
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आजकल की भागमभाग भरी जीवशैली और बिगड़े खानपान के कारण हमारा शरीर जटिल बीमारियों का अड्डा बनता जा रहा है. बीमारियां भी ऐसी की शरीर को अंदर तक खोखला करने लगे. ऐसी ही एक बीमारी थायराइड जो बिगड़ी जीवनशैली के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों के शरीर में अपना घर बनाकर उन्हें दवाइयों का मोहताज बना रही है.

थायराइड क्या होता है

डॉक्टरों की मानें तो थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर की एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो गर्दन के निचले हिस्से में तितली के आकार की होती है. यह थायरॉक्सिन (T4) और ट्रायोडोथायरोनिन (T3) हार्मोन बनाती है, जो हमारे मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करते हैं. जिसमें अचानक वजन बढ़ना, थकान महसूस होना, कब्ज, चेहरे पर सूजन, बालों का झड़ना और डिप्रेशन जैसा समस्याओं से जूझना पड़ता है. जो धीरे धीरे परेशानी का सबब बनाती है. क्योंकि इसे कंट्रोल में करने के लिए योग आपके लिए बेहतर होता है जिसमें  लेकिन इसे शरीर से हटाने के लिए जालंधर बंध (चिन लॉक) योग की एक महत्वपूर्ण भूमिका है.

जांलधर बंध कौन सा योग है

जालंधर बंध कोई आसन नहीं, बल्कि योग की एक 'मुद्रा' या 'लॉक' (Lock) है.इसे "चिन लॉक" (Chin Lock) भी कहा जाता है. योग विज्ञान में 'बंध' का अर्थ होता है शरीर की ऊर्जा को एक जगह बांधना या लॉक करना. जालंधर बंध मुख्य रूप से गले (विशुद्धि चक्र) के हिस्से पर काम करता है. यह मन को शांत रखने, एकाग्रता बढ़ाने और शरीर के कुछ महत्वपूर्ण अंगों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है.  

थायराइड ग्रंथि पर पड़ता है सकारात्मक प्रभाव

कई योग विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बंध का नियमित अभ्यास गले के आसपास के हिस्से को सक्रिय करता है, जिससे थायराइड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसके साथ ही यह श्वसन प्रणाली को भी संतुलित करने में मदद करता है. हालांकि, किसी भी योग अभ्यास की तरह इसे भी सही तरीके और सावधानी के साथ करना जरूरी होता है.

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जालंधर बंध करने का तरीका

  •  जालंधर बंध करना बहुत जटिल नहीं है, लेकिन शुरुआत में इसे धीरे-धीरे सीखना चाहिए.
  •  सबसे पहले आप किसी शांत और साफ जगह पर बैठें. 
  • इसके लिए पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में से कोई भी आरामदायक आसन चुन सकते हैं. 
  • बैठते समय अपनी पीठ सीधी रखें ताकि शरीर का संतुलन बना रहे.
  •  इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें.
  • इसके बाद धीरे-धीरे गहरी सांस लें और सांस को कुछ सेकंड के लिए अंदर रोक लें.
  •  इसके बाद अपनी ठोड़ी को धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकाएं और कोशिश करें कि वह आपकी छाती या हंसली की हड्डी के पास हल्के से टिक जाए.
  • जब आप इस स्थिति में हों, तो अपने कंधों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें और कोहनियों को सीधा रखने की कोशिश करें. 
  • ध्यान रखें कि गर्दन पर ज्यादा दबाव न पड़े और आप सहज महसूस करें। जितनी देर तक आरामदायक लगे, उतनी देर इस स्थिति में रहें.

कुछ सेकंड से करें शुरूआत

 शुरुआत में कुछ सेकंड ही काफी होते हैं. इसके बाद बंध खोलने के लिए धीरे-धीरे सिर को ऊपर उठाएं, कंधों को ढीला छोड़ दें और सामान्य सांस लेना शुरू कर दें. कुछ समय बाद आप फिर से इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं. नियमित अभ्यास के साथ आप इसकी अवधि धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं. 

जालंधर बंध करें नियमित अभ्यास

योग विशेषज्ञों का मानना है कि जालंधर बंध का नियमित अभ्यास करने से ध्यान लगाने में मदद मिल सकती है, क्योंकि इससे मन भटकने के बजाय एक जगह टिकने लगता है. इसके अलावा गले के आसपास रक्त संचार बेहतर होने से थायरॉयड ग्रंथि को भी लाभ मिल सकता है.

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