कोटा-बूंदी में एआई और आधुनिक तकनीक से सुधरेगी सड़क सुरक्षा, हर साल हो रही 400 मौतें

कोटा-बूंदी को सड़क दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम' की शुरुआत की जा रही है. इसमें तकनीक, बेहतर इंजीनियरिंग और जन जागरूकता के माध्यम से हर साल होने वाली 400 मौतों को रोकने का प्रयास किया जाएगा.

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सड़क दुर्घटना मुक्त बनाने के लिए 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम' की शुरुआत की जा रही है.

Rajasthan News: सड़क दुर्घटनाओं में जाने वाली अनमोल जिंदगियों को बचाने के लिए कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में एक नई मुहिम की शुरुआत होने जा रही है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल पर यहां ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम' लागू किया जाएगा. इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों को शून्य के करीब लाना है. संसद भवन में 'सेव लाइफ फाउंडेशन' के साथ हुई बैठक में इसे एक जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया गया.

हर साल 400 से ज्यादा मौतें, गंभीर स्थिति

'सेव लाइफ फाउंडेशन' की हालिया रिसर्च रिपोर्ट ने चिंताजनक तस्वीर पेश की है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में हर साल औसतन 400 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं. अध्ययन में 21 ऐसे घातक कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जहाँ आधी दुर्घटनाएं होती हैं. इसके अलावा 19 स्थानों पर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण 25 प्रतिशत और 12 संवेदनशील जगहों पर पैदल यात्रियों की मौतें दर्ज की गई हैं. रिपोर्ट यह भी बताती है कि कुल 60 थाना क्षेत्रों में से मात्र 25 थाने ऐसे हैं, जहाँ सड़क हादसों की 80 प्रतिशत मौतें होती हैं. इसमें तेज रफ्तार और गलत तरीके से ओवरटेकिंग बड़ी वजह बनकर उभरी हैं.

इंजीनियरिंग सुधार और एआई का मिलेगा साथ

इस कार्यक्रम के तहत NHAI, PWD, परिवहन और पुलिस विभाग मिलकर काम करेंगे. दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट का ऑडिट किया जाएगा और वहां जरूरी सुधार किए जाएंगे. सड़क किनारे स्थित स्कूलों के बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क हादसों के बाद के 'गोल्डन ऑवर' का पूरा लाभ मरीजों को मिलना चाहिए. इसके लिए एम्बुलेंस सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा.

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तकनीक और जन भागीदारी से बदलेंगे हालात

कोटा में पहले से मौजूद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को अब सड़क सुरक्षा के लिए और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा. लोकसभा अध्यक्ष ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया है. इससे मुख्य राजमार्गों और संवेदनशील इलाकों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा सकेगी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन का काम नहीं है बल्कि इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी और जन आंदोलन का रूप देना होगा ताकि भविष्य में युवाओं की जान बचाई जा सके.

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