Rajasthan News: नागौर के जन अस्पताल में प्रसूता रुकमा देवी की दुखद मृत्यु के बाद पिछले तीन दिनों से चल रहा धरना आखिरकार समाप्त हो गया है. प्रशासन और परिजनों के बीच पांच सूत्रीय मांगों पर बनी सहमति के बाद अब रुकमा देवी का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जा रहा है. इस मामले ने पिछले कुछ दिनों से स्थानीय स्तर पर काफी तूल पकड़ लिया था, लेकिन अब उच्च स्तरीय बातचीत के बाद स्थिति सामान्य होती दिख रही है.
क्या रही समझौते की प्रमुख शर्तें?
लंबे समय तक चले संघर्ष और कई दौर की वार्ताओं के बाद प्रशासन ने परिजनों की सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए रजनी सोनी सहित दो अन्य चिकित्सा कर्मियों को तुरंत प्रभाव से रिलीव कर दिया गया है. जब तक उच्च स्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक ये कर्मी किसी अन्य स्थान पर अपनी सेवाएं देंगे. दोषी पाए जाने पर पुलिस में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
सरकार द्वारा पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी. इसके अतिरिक्त 11 लाख रुपए भामाशाहों के सहयोग से एकत्रित करके परिवार को उपलब्ध कराए जाएंगे. परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने की मांग को प्रशासन ने मान लिया है. पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है, जो अपनी रिपोर्ट जल्द ही पेश करेगी.
जांच में जुटा प्रशासन
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस जिला अध्यक्ष हनुमान बांगड़ा और आरएलपी के पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके सानिध्य में प्रशासन के साथ हुई वार्ता सफल रही. हनुमान बांगड़ा ने कहा कि यह तीन दिन के कड़े संघर्ष और परिजनों के धैर्य की जीत है.
मोर्चरी के बाहर बड़ी संख्या में जुटे परिजनों और समाज के लोगों ने प्रशासन के आश्वासन के बाद पोस्टमार्टम के लिए सहमति दे दी है. अब सभी को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे मृत्यु के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा. प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी.