यमुना का पानी पाइपलाइन के जरिए से शेखावाटी क्षेत्र में पहुंचाने के लिए राजस्थान, हरियाणा और केंद्र सरकार के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoU) का मसौदा तैयार हो गया है. सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में दोनों राज्यों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किया जाएगा. इसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ही केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल भी मौजूद रहेंगे. इससे अब शेखावाटी के किसानों की सिंचाई और आम लोगों के पेयजल की दशकों पुरानी यमुना जल की मांग पूरी होने की उम्मीद बढ़ गई. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की मौजूदगी में राजस्थान व हरियाण सरकार के बीच यमुना जल समझौते पर बनी सहमति से शेखावाटी के किसानों और आमजन में खुशी की लहर है. दिल्ली में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की बैठक में मंगलवार (23 जून) को यमुना जल परियोजना के प्रमुख बिंदुओं को अंतिम रूप दिया गया.
1994 में दोनों राज्यों में हुआ था समझौता
दरअसल, हरियाणा और राजस्थान के बीच 1994 में समझौता हुआ था. इसके तहत सरप्लस पानी राजस्थान को देने की बात हुई थी, लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था. इस समझौते के तहत राजस्थान को यमुना के पानी का हिस्सा आवंटित तो किया गया था, लेकिन बुनियादी ढांचे और तकनीकी सीमाओं के कारण उसे अपने हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा था. इसके चलते राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र (चूरू, झुंझुनूं और सीकर) लंबे समय से गंभीर पेयजल और सिंचाई संकट से जूझ रहा था.
केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए जल संसाधनों के प्रबंधन को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यमुना जल परियोजना को दीर्घकालिक और टिकाऊ दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. इस परियोजना के तहत पारंपरिक नहरों के बजाय पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से पानी पहुंचाने का प्रस्ताव है. इससे पानी की बचत होगी और वितरण व्यवस्था का दायरा भी बढ़ेगा.

केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े छह राज्यों के बीच लंबित मुद्दों का समाधान हो गया है और इस परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएंगे. किशाऊ बांध परियोजना से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और अन्य सहभागी राज्यों को लाभ मिलेगा तथा भविष्य में जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी.
लाखों लोगों का बदलेगा जीवन
यमुना जल परियोजना राजस्थान, खासकर शेखावाटी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इससे लाखों लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा. वहीं, किसानों, उद्योगों और आमजन को सीधा लाभ मिलेगा. इस परियोजना के तहत पानी को पारंपरिक नहर के बजाय पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाने का प्रस्ताव है, जिससे पानी की बचत होगी और वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी. यमुना जल परियोजना पर सहमति बनने के बाद सीकर जिले के किसानों ने कहा कि शेखावाटी और सीकर जिले लोगों की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी होने की उम्मीद जगी है.
पानी मिलने से किसानों की दूर होगी समस्या
किसानों ने बताया कि शेखावाटी की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, लेकिन जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण खेती और पशुपालन दोनों प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में यमुना का पानी पाइपलाइन के जरिए क्षेत्र तक पहुंचने से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और किसानों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान हो सकेगा. उन्होंने कहा कि यमुना जल परियोजना से क्षेत्र में खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, पशुपालन को मजबूती मिलेगी, कल-कारखाने स्थापित होगें तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी.

यमुना जल समझौता परियोजना पर राजस्थान हरियाणा में सहमति से सीकर के किसानों में खुशी.
जल्द यमुना जल परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद
किसानों ने उम्मीद जताई कि एमओए के बाद परियोजना का कार्य शीघ्र शुरू होगा और शेखावाटी को उसके हिस्से का पानी जल्द मिलेगा. बता दें कि भू-जल दोहन के कारण सीकर जिले के नीमकाथाना, खंडेला, धोद, दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर क्षेत्र विशेष रूप से डार्क जोन की स्थित में पहुंच चुका है. इन इलाकों में सिंचाई के साथ ही पेयजल की भी गंभीर समस्या बनी हुई. गर्मियों के मौसम में तो पेयजल संकट और ज्यादा गंभीर हो जाता है. हालांकि जल जीवन मिशन के माध्यम से सरकार हर घर जल पहुंचाने का हर संभव प्रयास करती है, लेकिन फिर भी कई इलाकों में हालात आज भी विकराल बने हुए हैं. अब हरियाण-राजस्थान सरकार के बीच यमुना जल परियोजना की सहमति से पेयजल व सिंचाई के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद दिखाई दे रही है.
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