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कोटा: सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत पर 2 और डॉक्टरों पर गिरी गाज, 2 नर्सिंग कर्मियों पर भी एक्शन

चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव ने कहा कि सभी डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों को एसओपी के अनुसार काम कार्य करने के लिए ट्रेनिंग दिया जाए, मरीजों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में इलाज उपलब्ध कराया जाए.

कोटा: सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत पर 2 और डॉक्टरों पर गिरी गाज, 2 नर्सिंग कर्मियों पर भी एक्शन
कोटा: सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत पर 2 और डॉक्टरों पर गिरी गाज

कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH Kota) में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और स्वास्थ्य बिगड़ने से जुड़े मामले में भजनलाल एक्शन में है. एक के बाद एक लगातार सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है. इसी बीच राज्य सरकार ने दो और डॉक्टरों व दो नर्सिंगकर्मियों को निलंबित कर दिया है. साथ ही जेके लोन अस्पताल और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. सोमवार को कोटा पहुंची चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को भी दिनभर मामले की विभिन्न पहलुओं पर समीक्षा की.

जेके लोन अस्पताल में भी डॉक्टर पर एक्शन

इलाज और देखरेख स्तर पर लापरवाही सामने आने पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के डॉ. बद्रीलाल और डॉ. खुशबू मीणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया कर दिया. इसके अलावा जेके लोन अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी पिंकी खींची और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी मीनाक्षी मीणा को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है.

वहीं, लापरवाही बरतने पर जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोटा के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. 

2 दिन में SOP जारी करने के निर्देश

इससे पहले प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर न्यू मेडिकल कॉलेज कोटा के प्रिंसिपल को निर्देश दिए कि विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर अस्पताल प्रोसीजर्स, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, पेशेंट ट्रीटमेंट रिकॉर्ड आदि पर अगले 2 दिन एसओपी जारी की जाए. एसओपी जारी किए जाने के उपरांत उसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के लिए भी पाबंद किया.

उन्होंने कहा कि सभी डॉक्टरों और नर्सिंगकर्मियों को एसओपी के अनुसार काम कार्य करने के लिए ट्रेनिंग दिया जाए, मरीजों को स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में इलाज उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और इमरजेंसी यूनिट में उपचार प्रोटोकॉल की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए. संक्रमण नियंत्रण, नियमित स्टरलाइजेशन, पोस्ट ऑपरेटिव मॉनिटरिंग एवं दवा वितरण प्रणाली में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए.

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