राजस्थान सरकार ने किशनगढ़ एयरपोर्ट के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी है. भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की मांग पर कुल 5.367 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी. इसके लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) सहित आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी गई है. एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के पूरा होने के बाद किशनगढ़ हवाई अड्डा बड़े विमानों के संचालन के लिए और अधिक सक्षम हो जाएगा.
2 हजार मीटर लंबा है रनवे
एयरपोर्ट निदेशक बीएस मीणा के अनुसार, वर्तमान में किशनगढ़ एयरपोर्ट का रनवे लगभग 2000 मीटर लंबा है, जिसके कारण बड़े विमानों के संचालन में तकनीकी सीमाएं आती हैं. प्रस्तावित योजना के तहत रनवे की लंबाई बढ़ाकर 2700 मीटर की जाएगी. इसके अलावा रनवे-23 के आगे 900 मीटर लंबी साइड स्ट्रिप विकसित की जाएगी, जो टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विमानों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा क्षेत्र उपलब्ध कराएगी.
बड़े विमानों का होगा नियमित संचालन
नागरिक उड्डयन विभाग के संयुक्त सचिव दाताराम ने बताया कि रनवे-23 पर 900 मीटर लंबी एप्रोच लाइटिंग प्रणाली भी स्थापित की जाएगी. इससे खराब मौसम और कम दृश्यता की स्थिति में भी विमानों का संचालन अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगा. विस्तार कार्य पूरा होने के बाद एयरपोर्ट पर एयरबस A-320 श्रेणी के बड़े विमानों के नियमित संचालन की संभावनाएं काफी बढ़ जाएंगी.
पूरे एयरपोर्ट का होगा विस्तार
परियोजना में केवल रनवे विस्तार ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट के समग्र विकास की भी योजना शामिल है. इसके तहत टैक्सी-वे का विस्तार, अतिरिक्त एप्रन निर्माण, नए टर्मिनल ब्लॉक का विकास, पार्किंग सुविधाओं का विस्तार और सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया जाएगा. इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ एयरपोर्ट की संचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी.
जमीन के मालिकों को मिलेगा मुआवजा
अधिग्रहित की जाने वाली भूमि रामनेर की ढाणी क्षेत्र में रनवे-23 की दिशा में स्थित है. यह भूमि मुख्य रूप से बंजर और बारानी श्रेणी की बताई गई है. भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में 40 से अधिक निजी खातेदार, सह-खातेदार, धार्मिक ट्रस्ट और स्थानीय निकाय प्रभावित होंगे. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी पात्र भूमि स्वामियों को नियमानुसार उचित मुआवजा प्रदान किया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट विस्तार से न केवल किशनगढ़ बल्कि अजमेर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी. यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.
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