
Jodhpur Lok Sabha Seat Explainer: लोकसभा चुनाव 2024 की रणभेरी बजना शुरू हो गई है. राजस्थान की जोधपुर लोकसभा सीट वैसे तो हर बार चुनाव में हॉट सीट रहती है. क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह नगर होने के साथ-साथ सब की निगाहें जोधपुर पर लगी रहती है. यह बात अलग है कि पिछले दो लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंधी में राजस्थान में सभी 25 की 25 सीटें बीजेपी के खाते में गई हैं. वहीं इस बार कांग्रेस ने अपनी रणनीति में परिवर्तन करते हुए बीजेपी के राजपूत प्रत्याशी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के सामने कांग्रेस ने भी राजपूत प्रत्याशी करण सिंह उचियारडा को मैदान में उतारा है. यानी इस बार के लोकसभा चुनाव में जोधपुर में राजपूत बनाम राजपूत चुनाव लड़ने जा रहे हैं.
बाहरी और स्थानीय प्रत्याशी बनेगा मुद्दा
इस बार के चुनाव में स्थानीय राजपूत प्रत्याशी और बाहरी राजपूत प्रत्याशी के बीच में भी टक्कर देखने को मिलेगी. कांग्रेस के प्रत्याशी करण सिंह उचियारडा ने जोधपुर आते ही सबसे पहले बाहरी और स्थानीय प्रत्याशी को लेकर लोगों के बीच में गए. जिसको लेकर अब जोधपुर लोकसभा सीट को लेकर इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस बार बाहरी वर्सेस स्थानीय मुद्दा हावी रहेगा. हालांकि करण सिंह उचियारड़ा के द्वारा दिए गए बयान के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत वैभव गहलोत को लेकर सवाल खड़े किए कि वह जोधपुर से होने के बावजूद जालौर क्यों गए?
विकास का मुद्दा उठा रही कांग्रेस
वहीं कांग्रेस प्रत्याशी करण सिंह ने अपने चुनावी आगाज के साथ ही लोगों से संवाद के दौरान एक ही बात कहते नजर आए की 10 साल आपने बाहरी प्रत्याशी को मौका दिया, एक बार आप स्थानीय प्रत्याशी को मौका देकर देखें. 5 साल में आपके बीच में आपका सेवक बनकर कार्य करूंगा. उन्होंने शेखावत पर 10 साल में कोई विकास नहीं करवाए जाने के भी आरोप लगाए.
अब गजेंद्र सिंह शेखावत अपनी चुनावी मीटिंग में उनके द्वारा करवाए गए कार्यों की लिस्ट लेकर क्षेत्र वासियों को बता रहे हैं. कि उन्होंने 10 साल में उनके क्षेत्र में कितने करोड़ का विकास किया है. जिसकी सूची लेकर वह अपने भाषण में बताते हैं. लेकिन इसके साथ-साथ यह भी कहते हैं. कि मेरे बुजुर्ग कहते थे, कि काम करने के बाद गिनना नहीं चाहिए. लेकिन चुनावी सीजन है और कुछ लोग जो आरोप लगा रहे हैं. इसलिए मैं कामों को गिना रहा हूं.

स्थानीय प्रत्याशी होने से मिलेगा फायदा!
जोधपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने तीसरी बार शेखावत पर भरोसा जताया है. लेकिन कांग्रेस ने भी राजपूत कार्ड खेल कर इस लोकसभा चुनाव को टक्कर देने के लिए कांग्रेस के करण सिंह को मैदान में उतारा है. शेखावत वैसे शेखावाटी से आते हैं. हालांकि उनकी पढ़ाई जोधपुर में हुई और लंबे समय से वे जोधपुर में रह रहे हैं. लेकिन करण सिंह उचियारड़ा जोधपुर के ही रहने वाले हैं. इस इलाके में उनके समाज का वर्चस्व भी है. ऐसे में कांग्रेस को यह लगता है कि उसका फायदा करण सिंह को और उनकी पार्टी को मिलेगा. यही कारण है कि बाहरी और स्थानीय का मुद्दा इस चुनाव में उठाया जा रहा है.
खुद की पार्टी के लोगों ने शेखावत का किया विरोध
वैसे तो गजेंद्र सिंह शेखावत का विरोध पिछले दिनों उनकी ही पार्टी के शेरगढ़ विधायक और कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर किया था. इसके बाद पुलिस में मुकदमे भी दर्ज हुए थे. लेकिन शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौर के विरोध और दिल्ली से आये निर्देश के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल ने मध्यस्थता करवा कर इन दोनों के बीच में समझौता करवा दिया गया है. लेकिन यह समझौता ऊपरी तौर पर दिखाई पड़ रहा है. कार्यकर्ताओं में शेखावत को लेकर नाराजगी है. और यही कारण है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशी भी गजेंद्र सिंह शेखावत को गप्पू बन्ना की उपाधि दे रहे हैं. करण सिंह अपनी सभाओं में कहते नजर आते हैं कि गप्पू बना वर्सेस सच्ची बना यानी कि मैं सच बोलने वाला हूं. जबकि गजेंद्र सिंह शेखावत सिर्फ गप्पे मारते हैं.
विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट को लेकर हुई थी नाराजगी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का विरोध सिर्फ इसी बात का है कि वह अपने साथ अपने खास लोगों को ही रखते हैं. शेखावत पर यह भी आरोप है कि उन्होंने पोकरण विधानसभा के विधायक प्रताप पुरी जी महाराज का वीडियो विधानसभा चुनाव के दौरान वायरल हुआ था. हालांकि उन्होंने शेखावत का नाम नहीं लिया था. लेकिन उस वीडियो से यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि यह सब शेखावत के लिए ही प्रताप पुरी महाराज कह रहे हैं. इसके अलावा शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़ और उनके समर्थकों को लगता है कि उनके टिकट मिलने में देरी का कारण गजेंद्र सिंह शेखावात ही रहें और मंत्री बनने में भी रोड़ा गजेंद्र सिंह शेखावत ने ही अटकाया. क्योंकि बाबू सिंह राठौड़ वसुंधरा के गुट में से आते हैं.
वहीं बात गजेंद्र सिंह खींवसर की भी की जाए तो पिछले दिनों एम्स के कार्यक्रम में फोटो नहीं लगाने के विवाद के बीच शेखावत मंच पर थे. उस बात को लेकर भी कार्यकर्ता अंदर खाने चर्चा करते नजर आते हैं. अब देखना यह है कि भले ही मुख्यमंत्री ने आगे बढ़कर बाबू सिंह राठौड़ और शेखावत के बीच में सुलह करवा दी हो. शेखावत खुद भी कहते नजर आ रहे हैं. कि उनके कार्यकर्ताओं को वह मना लेंगे घर का मामला है. लेकिन यह सुलह वाकई वास्तविक धरातल पर होती है या नहीं?
दोनों ही पार्टियों के अपने-अपने दावे
दोनों ही पार्टियों अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही है. जहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पीएम मोदी पर भरोसा है और उन्हें यकीन है कि राम मंदिर बनाने के साथ-साथ विकसित भारत के लिए लोग प्रधानमंत्री को देखकर मतदान करेंगे.
वहीं कांग्रेस के करण सिंह इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि 10 साल के गजेंद्र सिंह शेखावत के कामों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं. यहां तक कि उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे को लेकर यह भी कह दिया कि राम किसी के बाप की बपौती नहीं है. कांग्रेस के राम और बीजेपी के राम अलग-अलग है. जबकि वह तो खुद क्षत्रिय है और बिना अपने ईष्ट का नाम लिए कभी वह खाना तक नहीं खाते हैं.
जोधपुर लोकसभा सीट जातीय आंकड़ों के अनुसार राजपूत बाहुल्य सीट है. जिसमें मुस्लिम, बिश्नोई, ब्राह्मण, जाट, मूल ओबीसी समाज महत्वपूर्ण भूमिका में है. महत्वपूर्ण जातियों में राजपूत 440000, मुस्लिम 290000, बिश्नोई 180000, ब्राह्मण 140000, मेघवाल 140000, जाट 130000 और माली समाज एक लाख, वहीं वैश्य समाज 70000 के पास है. जो की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वहीं एससी एसटी वर्ग के कुल चार लाख से अधिक मतदाता हैं. मेघवाल के अलावा मूल 80000 वाल्मीकि 80000 खटीक 30000 गवारिया डोली शास्त्री और अन्य बिश्नोई, माली के अलावा शेष मूल ओबीसी जातियां कुल चार लाख से अधिक हैं. जिसमें कुमार 70000, रावना राजपूत 60000, सुथार 60000, चारण 40000, सैन 40000, पटेल 40000, घांची 30000, देवासी 30000, दर्जी, वैष्णव और अन्य जातियां जो की निर्णायक भूमिका में रहते हैं.
जोधपुर की 8 विधानसभा में से 7 में BJP के विधायक
पिछले तीन चुनाव में से दो बार बीजेपी के गजेंद्र सिंह शेखावत ही प्रत्याशी रहें और जीतें. उससे पहले कांग्रेस की चंद्रेश कुमारी सांसद हुआ करती थी.
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