Mahendrajeet Singh Malviya: नेता प्रतिपक्ष का पद, ED कार्रवाई का डर; वो 4 कारण जिसके चलते महेंद्रजीत मालवीय कांग्रेस छोड़ भाजपा में हो रहे शामिल

Rajasthan Politics: राजस्थान में कांग्रेस के कद्दावर नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा ज्वाईन करने वाले हैं. वो इस समय बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं. गहलोत को राजस्थान का गांधी कहने वाले मालवीय आखिर कांग्रेस से क्यों नाराज हैं, आईए जानते हैं.

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केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और पीएम मोदी के साथ कांग्रेस नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय.

Mahendrajeet Singh Malviya: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) से पहले भाजपा राजस्थान में कांग्रेस (Congress) को बड़ा झटका देने की तैयारी में हैं. वागड़ क्षेत्र के कद्दावर कांग्रेस नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले हैं. ऐसी अटकलें हैं कि उनके साथ कांग्रेस के और भी कई नेता पाला बदलने वाले हैं. महेंद्रजीत सिंह मालवीय कांग्रेस में करीब 5 दशक से थे. NSUI के जरिए छात्र राजनीति से शुरुआत के बाद महेंद्रजीत मालवीय कांग्रेस से विधायक, मंत्री, सांसद बनते हुए कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के सदस्य तक बने. लेकिन अब वो अपनी ही पार्टी से नाराज बताए हैं. एक समय में गहलोत को राजस्थान का गांधी कहने वाले महेंद्रजीत सिंह मालवीय आखिर कांग्रेस क्यों छोड़ रहे हैं... इस बात की पड़ताल करें तो कई बातें सामने आती है. आइए जानते हैं महेंद्रजीत सिंह मालवीय के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने की बड़ी वजहें. 

मालवीय की कांग्रेस से नाराजगी की सबसे बड़ी वजह- नेता प्रतिक्ष नहीं बनाना

कांग्रेस के बैनर तले छात्र संघ अध्यक्ष से लेकर चार बार विधायक, दो बार जिला प्रमुख, एक बार सांसद और दो बार प्रधान रहने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया के एकाएक भाजपा का दामन थामने का निर्णय करने के पीछे चार महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आ रही हैं. इसमें सबसे बड़ा कारण कांग्रेस पार्टी द्वारा उनको नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाना माना जा रहा है. जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मालवीय को नेता प्रतिपक्ष बनाने की पैरवी की थी और मालवीय पूरी तरह से आश्वस्त थे कि उनकी वरिष्ठता को देखते हुए उनको मौका मिलेगा. एनडीटीवी राजस्थान से बातचीत करते हुए उन्होंने पूर्व में दावेदारी भी जाता चुके थे, लेकिन कांग्रेस पार्टी द्वारा उनको नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाने से नाराज चल रहे थे. 

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ईडी एक्शन का डर

वहीं दूसरा कारण यह है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस के कद्दावर नेता और मालवीय के काफी नजदीकी दिनेश खोड़निया पर पेपर लीक मामले में ईडी की कार्रवाई हुई थी. उस दौरान भी मालवीय का नाम भी काफी सुर्खियों में था और आशंका जताई जा रही थी कि मालवीय पर भी ईडी कार्रवाई कर सकती है.

इधर कुछ दिनों पहले बांसवाड़ा के भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी पत्र लिखकर मालवीय के खिलाफ ईडी कार्रवाई की मांग की है. ऐसे में अब यदि मालवीय भाजपा में शामिल हो जाते हैं उनके पुराने कारनामों पर भी कुछ दिनों के लिए पर्दा डाल दिया जाएगा.  

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भाजपा से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं मालवीय

इसी तरह तीसरा कारण यह भी नजर आ रहा है कि कांग्रेस महेंद्रजीत सिंह मालवीय को कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहते हैं लेकिन मालवीय संभावित हार की आशंका को देखते हुए इससे इनकार कर चुके हैं. अब चर्चा हैं कि महेंद्रजीत मालवीय को भाजपा बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है. जहां से अभी भाजपा के कनकमल कटारा सांसद हैं. कटारा का टिकट कट सकता है. 

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एक पारिवारिक वजह भी, मालवीय के समधी हैं भाजपा नेता

उपरोक्त तीन कारणों के कारण महेंद्रजीत मालवीय के कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाईन करने की एक वजह पारिवारिक भी हैं. महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा के नेता और पूर्व मंत्री धनसिंह रावत के समधी हैं. मालवीय के बेटे की शादी रावत की बेटी से तीन साल पहले ही शादी हुई है. इसके चलते भी लोग कयास लगा रहे हैं कि भाजपा ने आदिवासी अंचल में अपना जनाधार बढाने के लिए मालवीय को भाजपा के पाले में लाना चाहते हैं. 

वहीं धनसिंह रावत इस तीर से दो निशाना साधना चाहते हैं. धानसिंह रावत नहीं चाहते की उनके धुर विरोधी हकरु मईडा को लोकसभा चुनाव में भाजपा का टिकट मिले, क्योंकि विधानसभा चुनाव में मईडा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दावा किया था. इसको लेकर रावत और मईडा के बीच अदावत चल रही थी. अब देखना है कि मालवीय का भाजपा में शामिल होना लोकसभा चुनाव में उनके और  पार्टी के लिए कितना फायदे का सौदा रहता है. 

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