Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में करौली जिले की टोडाभीम तहसील से विधायक घनश्याम महर ने राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि किसान किसी पार्टी का नहीं होता है. किसान की कोई जाति नहीं होती है. किसान का कोई धर्म नहीं होता है. किसान देश और प्रदेश को अन्न देता है. देश के विकास में किसानों का बड़ा योगदान है.
किसानों की दयनीय स्थिति
विधायक महर ने कहा कि प्रदेश में किसानों के हालात बहुत खराब हैं. पिछले साल अतिवृष्टि से किसानों का बड़ा नुकसान हुआ. लेकिन सरकार ने क्षेत्रवाद देखकर मुआवजा दिया. जहां भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे वहां मदद मिली लेकिन अन्य जगहों पर किसानों को कुछ नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में भी किसानों के लिए कोई योजना नहीं दी गई है. महर ने सरकार से अपील की कि किसानों की मदद बिना भेदभाव के की जाए क्योंकि वे प्रदेश की रीढ़ हैं.
पेंशन की बड़ी समस्या
महर ने बताया कि 7 महीने से प्रदेश में लोगों को पेंशन नहीं मिली है. प्रदेश में 30-40 प्रतिशत लोग पेंशन पर ही निर्भर हैं. पेंशन न देना सरकार की बहुत बड़ी विफलता है. उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है.
सिलिकोसिस मरीजों का दर्द
विधायक ने अपने जिले करौली का जिक्र करते हुए कहा कि सिलिकोसिस के मरीजों को कई सालों से पैसे और दवाइयां नहीं मिली हैं. उन्होंने सरकार से मांग की कि इन मरीजों की मदद तुरंत की जाए क्योंकि वे दर्द में जी रहे हैं.
महिलाओं के साथ धोखा
महर ने स्वयं सहायता समूहों पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को लोन देती है लेकिन महिलाओं को पता ही नहीं चलता कि उनके नाम से लोन लिया गया है. बीच में दलाल पैसे खा जाते हैं. जब महिलाओं को पता चलता है तब बैंक उनके घर किस्त लेने आ जाता है. ग्रामीण इलाकों में ऐसे कई मामले आए हैं. महर ने सरकार से निवेदन किया कि इस मामले पर ध्यान दे और दलालों पर कार्रवाई करे.
बेरोजगारी का बढ़ता संकट
अंत में महर ने प्रदेश में बेरोजगारी को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश में युवाओं को खुद को सड़कों पर आना पड़ रहा है. सरकार को रोजगार देने पर ध्यान देना चाहिए. विधायक घनश्याम महर के इन आरोपों से सदन में हंगामा मच गया. यह बहस प्रदेश की जमीनी समस्याओं को उजागर करती है और सरकार पर दबाव बढ़ा रही है.