Ajmer Dargah: अजमेर दरगाह शरीफ (Ajmer Dargah Sharif) परिसर से जुड़े एक विवादित दावे ने एक बार फिर सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. राष्ट्रीय महाराणा प्रताप सेना की ओर से सोमवार को अजमेर जिला न्यायालय (Ajmer District Court) में याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें दरगाह परिसर में शिव मंदिर (Shiv Temple in Ajmer Dargah) होने के दावे की तथ्यात्मक जांच और सर्वे कराने की मांग की गई है.
संगठन का कहना है कि यह मामला केवल आस्था का नहीं बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच न्यायालय के निर्देश पर होनी चाहिए. याचिका दायर किए जाने को लेकर शहर में चर्चा का माहौल बना हुआ है.
धार्मिक आस्था के साथ कानूनी दावा
याचिका दायर करने से पहले महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज्यवर्धन सिंह राठौड़ अपने अधिवक्ताओं की टीम के साथ पुष्कर पहुंचे, जहां उन्होंने पुष्कर सरोवर में विधिवत पूजा-अर्चना की. तीर्थ पुरोहित मधुसूदन पाराशर द्वारा संपन्न करवाई गई इस पूजा के दौरान पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की. इसके बाद डॉ. राठौड़ अपनी टीम के साथ अजमेर पहुंचे और जिला न्यायालय में याचिका पेश करने की प्रक्रिया शुरू की. संगठन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में उठाया गया है.
अगर शिवलिंग न मिले तो फांसी स्वीकार
मीडिया से बातचीत में डॉ. राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपने दावे को लेकर बेहद तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय के आदेश पर सर्वे या खुदाई होती है और वहां शिव मंदिर या शिवलिंग नहीं मिलता, तो वह स्वयं को फांसी की सजा के लिए तैयार मानते हैं. उनके इस बयान ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस को और तेज कर दिया है. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता एस.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि याचिका ऐतिहासिक दस्तावेजों और कानूनी आधार पर दायर की गई है और अंतिम फैसला न्यायालय पर ही निर्भर करेगा. उल्लेखनीय है कि अजमेर दरगाह शरीफ देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, ऐसे में इस मामले में आगे की हर प्रक्रिया पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है.
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