सर्दी के मौसम में शिशुओं की देखभाल करना बहुत मुश्किल हो जाता है. थोड़ी सी लापरवाही शिशु को बीमार कर देती है. रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और फेफड़ों का विकास ठीक से न होने की वजह से शिशु बदलते मौसम की वजह से प्रभावित होते हैं. सर्दी के मौसम में सर्दी, खांसी-जुकाम और छाती में बगलम जमना जैसी परेशानियां होती है.
अजवाइन रखता है गर्म
सामान्य सर्दी, खांसी-जुकाम में आयुर्वेद में अजवाइन की पोटली का महत्व बताया गया है. इस तकनीक का इस्तेमाल दादी-नानी के जमाने से होता आया है और आज भी अगली पीढ़ी को सिखाया जा रहा है. अजवाइन की पोटली शिशु के शरीर को गर्म रखने की कोशिश करती है और बाहर के ठंडे वातावरण से उसे बचाती है. तो चलिए जानते हैं कि कैसे अजवाइन की पोटली बनाएं और उसके इस्तेमाल में क्या सावधानी बरतें. इसके लिए एक सूती कपड़ा लें जो मुलायम हो और शिशु को बिल्कुल न चुभे.
अजवाइन की पोटली बनाएं
2 चम्मच अजवाइन को कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और दूसरी तरफ तवे को धीमी आंच पर गर्म होने के लिए रख दें. फिर पोटली को हल्का गर्म कर उससे शिशु के पास ले जाकर उसकी छाती का सेंक करें. ध्यान रखें पोटली गुनगुनी हो, गर्म न हो. शिशु की स्किन बहुत सेंसिटिव होती है. ऐसे में पोटली की गर्माहट की जांच कर लें.
अजवाइन की गंध से करें उपचार
अगर शिशु की स्किन सेंसिटिव है, तो अजवाइन की गंध से उपचार करने की कोशिश करें. पोटली की हल्की गर्माहट और इसकी प्राकृतिक सुगंध शिशु के नासामार्ग को साफ करती है, भारीपन कम करती है और श्वास को सहज बनाती है. अजवाइन की पोटली उष्ण, कफ-शामक और पूरी तरह सुरक्षित उपाय है.
अजवाइन की गंध वातावरण गर्म रखता है
शिशु के सोते समय अजवाइन की पोटली को हल्का गर्म कर उसके सिरहाने पर भी रख सकते हैं. अजवाइन की गंध वातावरण गर्म रखने में मदद करेगी. इसके साथ ही रोजाना जैतून के तेल से शिशुओं की मालिश करने से भी आराम मिलेगा. जैतून का तेल गर्म होता है और इससे मालिश करने से शिशु का पूरा शरीर गर्म रहेगा.
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