Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने बुधवार को झुंझुनू में एक दलित युवक के अपहरण और हत्या के मामले में 'शराब माफिया' सुशील कुमार का लाइसेंस रद्द कर दिया. जिला आबकारी अधिकारी ने बुधवार देर शाम आदेश जारी करते हुए बताया कि जब आरोपी सुशील कुमार की शराब की दुकान का निरीक्षण किया गया तो रिकॉर्ड रजिस्टर गायब मिला. इसके बाद, दलित युवक की मौत के मामले में और बुनियादी मानदंडों के उल्लंघन के लिए कुमार का लाइसेंस रद्द कर दिया गया.
आज बुलडोजर चलाने की तैयारी
इसके अलावा झुंझुनू जिले के बालोदा गांव में कथित तौर पर दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या करने वाले आरोपियों की अवैध संपत्ति पर भी बुलडोजर चलाने की तैयारी की जा रही है. एसपी राजर्षि राज वर्मा ने कहा, 'कोई भी अवैध संपत्ति पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. जिले के सभी शराब कारोबारियों की संपत्ति का भी आकलन किया जायेगा. जहां भी अवैध संपत्ति मिलेगी, प्रशासन के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी. एसपी ने कहा, 'हमारा प्रयास पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित करना है.'
अपहरण के बाद पीट-पीट कर हत्या
14 मई को बलौदा में शराब कारोबार से जुड़े कुछ बदमाशों ने रामेश्वर नाम के एक दलित युवक का अपहरण कर लिया और उसकी पिटाई की, जिसकी बाद में मौत हो गई. युवक की बेरहमी से पिटाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके कारण राज्य प्रशासन को नेटिज़न्स से आलोचना का सामना करना पड़ा. कई सामाजिक संगठनों ने एसपी से मुलाकात कर आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, राज्य कांग्रेस प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह ओला सहित राजनेताओं ने भी राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर राज्य सरकार पर सवाल उठाया.
डोटासरा-गहलोत ने साधा निशाना
डोटासरा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'झुंझुनू में शराब माफियाओं ने एक दलित युवक को इतनी बेरहमी से पीटा कि उसकी मौत हो गई. स्वभाव से दलित विरोधी भाजपा सरकार में दलितों पर अत्याचार और जातिगत भेदभाव लगातार बढ़ रहे हैं.' वहीं अशोक गहलोत ने कहा, 'झुंझुनू के सूरजगढ़ में शराब माफियाओं द्वारा दलित युवक की हत्या और जघन्य अपराध का वीडियो वायरल करना राजस्थान में सरकार और पुलिस की कमजोर होती साख का प्रतीक है. प्रदेशभर से आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। बीजेपी सरकार आने के बाद दलितों के खिलाफ अपराध बढ़े हैं. मीडिया में छवि निर्माण में व्यस्त राजस्थान सरकार को इन घटनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उनकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए काम करना चाहिए.'
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