BlueEconomy News: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य को सीधे समुद्र से जोड़ने और माल परिवहन को सुगम बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने जवाई-लूनी-रण ऑफ कच्छ राष्ट्रीय जलमार्ग (NW-48) को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं. शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रोजेक्ट के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
अरब सागर तक निर्बाध आवाजाही का रास्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के उद्योगों को माल परिवहन और निर्यात के लिए जलमार्ग उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. इस जलमार्ग के अस्तित्व में आने से राजस्थान, रण ऑफ कच्छ के रास्ते सीधे अरब सागर से जुड़ जाएगा. इससे न केवल परिवहन की लागत कम होगी, बल्कि माल की आवाजाही भी तेज और निर्बाध हो सकेगी.
आईआईटी मद्रास और IWAI तैयार करेंगे ब्लूप्रिंट
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और आईआईटी मद्रास को निर्देश दिए कि वे इस प्रोजेक्ट का तकनीकी आकलन करें. उन्होंने जहाजों के अनुमानित ट्रैफिक और अन्य वित्तीय पहलुओं की तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा. गौरतलब है कि 27 अक्टूबर 2025 को राज्य सरकार और IWAI के बीच इस संबंध में एमओयू (MoU) साइन किया गया था.
आज मुख्यमंत्री कार्यालय में राष्ट्रीय जलमार्ग (NW-48) एवं प्रदेश में प्रस्तावित नेशनल टेक्नोलॉजी सेंटर फॉर पोर्ट्स, वाटरवेज एंड कोस्ट्स (NTCPWC) को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की।
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) April 3, 2026
अधिकारियों को IIT Madras के साथ मिलकर परियोजना के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) को… pic.twitter.com/q2v90tViMd
इन उद्योगों को मिलेगा संजीवनी जैसा लाभ
यह राष्ट्रीय जलमार्ग राजस्थान और गुजरात के औद्योगिक परिदृश्य को बदल देगा. इसके माध्यम से मुख्य रूप से निम्नलिखित उत्पादों का परिवहन सुगम होगा, जिसमें पेट्रोकेमिकल्स और खनिजों की ढुलाई, सीमेंट और केमिकल उद्योग और औद्योगिक वस्तुएं एवं अन्य निर्यात उत्पाद के उद्योगों को तरक्की का बेहतर रास्ता मिलेगा.
समग्र विकास का बनेगा आधार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विश्वास जताया कि NW-48 प्रदेश के समग्र विकास का मजबूत आधार बनेगा. इससे न केवल राजस्थान, बल्कि पड़ोसी राज्यों के व्यापारियों को भी सुगम माल ढुलाई का लाभ मिलेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में राजस्थान के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी.
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