Rajasthan News: महंगाई के दौर में राजस्थान में ऐसे भी कर्मचारी काम कर रहे हैं और अपना घर परिवार को पाल रहे हैं जिन्हें पूरे साल में ही सिर्फ 15000 रुपए का मानदेय मिलता है. आज इन कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक माली हालत और आर्थिक तंगी की समस्या सरकार के सामने रखी. सरकार से गुजारिश की है कि वह साल 1988 से ग्राम प्रतिहारी के पद पर राजस्व विभाग में काम कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें सरकार अल्पकालीन से पूर्णकालीन का दर्जा दें. उन्हें प्रति माह 16000 रुपए की तनख्वाह दें, ताकि वह भी सम्मान के साथ अपने परिवार के साथ गुजर-बसर कर सके. क्योंकि साल भर में 15000 रुपए का मानदेय मिलना और फिर उस पैसे से अपना घर चलाना कैसे भी संभव नहीं है.
ऐसे में आज कर्मचारियों ने राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के बैनर तले प्रदेश व्यापी आव्हान पर राजस्थान ग्राम प्रतिहारी संघ जिला शाखा बारां ने बारां कलेक्टर पर प्रदर्शन किया. ग्राम प्रतिहारी कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन दिया. अपनी मांगे मानने की गुहार राज्य सरकार से की.
28 रुपए रोजाना मिलता है तनख्वाह के नाम
प्रतिहारी कर्मचारी सुरेंद्र कुमार ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि 25 सालों से वह राजस्व डिपार्टमेंट में ग्राम प्रतिहारी के रूप में काम कर रहा है. रोजाना ₹28 तनख्वाह के नाम पर पैसा मिलता है. पूरे साल में ₹15000 सरकार मानदेय देती है. ऐसे में इस मानदेय से किसी भी सूरत में आज के वक्त में घर का खर्चा नहीं चल सकता. सरकार भी इस बात को भली-भांति जानती है. कर्मचारियों को मनरेगा के बराबर कम से कम मानदेय दिया जाए. ग्राम प्रतिहारी राजस्व डिपार्टमेंट में पटवार घर की सफाई करते हैं. नोटिस वितरित करते हैं. मेड बंदी और पत्थर गड़ी का काम करते हैं. गिरदावरी और वसूली का काम करते हैं. आपदा के दौरान भी काम करते हैं.
न्यूनतम मजदूरी से भी कम पैसे पर सरकार 12 महीने काम करवाती है
ग्राम प्रतिहारी बंटी गुर्जर का कहना है कि वह भी लंबे समय से यह काम कर रहा है. सरकार 12 महीने उनसे काम लेती है और न्यूनतम मजदूरी से भी कम पैसा उन्हें देती है. इस हालत में वह अपना घर नहीं चला पा रहे हैं. ऐसे में उन्हें हर महीने 16000 रूपए का वेतन दिया जाए. उन्हें स्थाई किया जाए. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मांग को माने ताकि ग्राम प्रतिहारी कर्मचारियों का हौसला बढ़ सके.
कर्मचारी देवेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि इस मांग को लेकर पहले भी राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ सरकार के सामने रख चुका है कि कर्मचारियों को नियमित किया जाए. उन्हें सम्मान पूर्वक मानदेय दिया जाए. क्योंकि इतने न्यूनतम मानदेय में परिवार का लालन-पालन नहीं किया सकता परिवार के मुखिया पर बड़ी जिम्मेदारी होती है.
सरकार ऐसे कर्मचारियों से नियमित काम ले रही है. लेकिन वेतन जो दिया जाता है वह बेहद ही कम है. महासंघ के प्रदेश सह मंत्री नंदलाल केसरी ने कहा कि राजस्थान में 16000 ग्राम प्रतिहारी कर्मचारी काम कर रहे हैं जिन्हें सरकार स्थाई करें.
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