RGHS में बदलाव के खिलाफ लामबंद हुए कर्मचारी, महासंघ ने आंदोलन का किया ऐलान

RGHS में बदलाव के खिलाफ उतरे कर्मचारी महासंघ ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर सरकार और अधिकारियों को पहले ही अवगत करा दिया गया था. जब शासन की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो अब कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं.

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RGHS में बदलाव के खिलाफ लामबंद हुए कर्मचारी

राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी योजना RGHS में किए गए कथित बदलावों के खिलाफ प्रदेश के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है. सोमवार को 'राजस्व मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ' के आह्वान पर राज्यभर के कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों और आरजीएचएस में कटौती के विरोध में एक बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. आंदोलन के पहले चरण के तहत सोमवार को राज्य के सभी जिलों में कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट, उपखंड कार्यालयों और तहसीलों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टरों व प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा.

सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

महासंघ के प्रदेश सभाध्यक्ष शम्भूसिंह राठौड़ ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार लगातार कर्मचारियों को मिलने वाले हित-लाभों को बंद करने का प्रयास कर रही है. सरकार का रवैया कर्मचारियों की वाजिब मांगों के प्रति बेहद उदासीन है, जिसके कारण प्रदेश के करीब 7 लाख कर्मचारियों में गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है.

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वहीं, महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर यादव ने प्रदेश के सभी अन्य कर्मचारी संगठनों से एकजुट होने की अपील की है. उन्होंने कहा कि RGHS योजना का निजीकरण करने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा कर्मचारियों के अवकाश एन्केशमेन्ट (Leave Encashment) और सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले समस्त वित्तीय परिलाभ समय पर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे रिटायर्ड कर्मचारियों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

मजबूर होकर सड़क पर उतरे कर्मचारी

महासंघ के महामंत्री सुरेश तोबड़िया ने बताया कि संगठन अपनी मांगों को लेकर बेहद गंभीर है. महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, राज्य की मुख्य सचिव, चिकित्सा सचिव, कार्मिक सचिव और प्रमुख शासन सचिव (राजस्व) से मुलाकात की थी. इस दौरान अधिकारियों को आंदोलन का विधिवत नोटिस दिया गया था और उनकी मांगों से अवगत कराया गया था. लेकिन शासन की ओर से कोई भी सकारात्मक पहल या आश्वासन नहीं मिलने के कारण अंततः कर्मचारियों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा.

महासंघ का कहना है कि अगर शासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की जाती है. अन्य मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है और RGHS योजना को सुचारू नहीं किया जाता है तो आगामी 7 दिन में आन्दोलन के अग्रिम चरण की घोषणा कर आन्दोलन को अधिक प्रभावी कर दिया जायेगा, जिसके लिये सरकार जिम्मेदार होगी.

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