राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने संकेत दिए कि सरकार अब RGHS को इंश्योरेंस मॉडल पर ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. मंत्री ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में वित्तीय अनियमितताओं और बढ़ते खर्च को देखते हुए सरकार के पास इंश्योरेंस मॉडल अपनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं. चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पहले RGHS योजना में सरकार को करीब 4 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था, लेकिन RGHS के चिकित्सा विभाग के तहत आने के बाद सरकार ने करीब 800 करोड़ रुपए की बचत की है. उन्होंने कहा कि सरकार का जो पैसा खर्च होता है, वह आम जनता और टैक्सपेयर्स का पैसा है, इसलिए उसके सही उपयोग को सुनिश्चित करना जरूरी है.
योजना में कई तरह की गड़बड़ियां
गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि योजना में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई थीं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन के जरिए लोग हेयर ऑयल और दंत मंजन जैसी चीजें भी ले रहे थे. उन्होंने कहा कि सरकार अब धीरे-धीरे इस व्यवस्था को सुधारने का काम कर रही है. चिकित्सा मंत्री ने माना कि यह सिस्टम कई साल से बिगड़ा हुआ था और इसे सुधारने में समय लगेगा.
खींवसर ने कहा, “इतने सालों से यह सब चल रहा था. सिस्टम को सुधारने में थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन हम लगातार सुधार कर रहे हैं.” खींवसर ने कहा कि RGHS को इंश्योरेंस मोड पर ले जाना ही सबसे व्यवहारिक विकल्प दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना यानी MAA योजना भी इसी मॉडल पर आधारित है और सफलतापूर्वक संचालित हो रही है. उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था में एम्पनेल्ड अस्पताल, मरीज और इंश्योरेंस एजेंसी तीनों मिलकर काम करते हैं.
RGHS में सुधार पर काम करेगी सरकार
आयुष पोर्टल के जरिए मरीज देशभर में किसी भी लिस्टेड डॉक्टर या अस्पताल में इलाज करा सकते हैं. मंत्री ने कहा कि सरकार ने लोगों को यह विकल्प दिया है कि वे केवल सरकारी अस्पतालों पर निर्भर न रहें, बल्कि किसी भी एम्पनेल्ड अस्पताल में उपचार ले सकें. माना जा रहा है कि चिकित्सा मंत्री के इस बयान के बाद सरकार RGHS की व्यवस्था में सुधार लाने की रफ्तार और तेज करेगी.
हालांकि पिछले दिनों चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव सचिन गायत्री राठौड़ ने कर्मचारी संगठनों से भी इस मुद्दे पर बात की थी. इस विषय में कर्मचारी संगठनों का कहना है कि RGHS में सुधार के लिए इंश्योरेंस कंपनियों के हवाले नहीं किया जाना चाहिए. ऐसे में विभाग इस मुद्दे पर सर्वमान्य समाधान भी चाहता है और इसी दिशा में काम करने की मंशा भी जताई है.
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