विज्ञापन

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव पर सस्पेंस बरकरार, याचिकाकर्ता ने कहा- इलेक्शन में देरी से काम अटक रहे

राजस्थान हाईकोर्ट में गिर्राज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने अवमानना याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता ने एनडीटीवी से बातचीत करते हुए मामले की जानकारी दी.

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव पर सस्पेंस बरकरार, याचिकाकर्ता ने कहा- इलेक्शन में देरी से काम अटक रहे

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. याचिकाकर्ता और पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है. हालांकि, इस मामले में आज (18 मई) सुनवाई टल गई है. अदालत ने सोमवार (18 मई) को कहा कि राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र पर फैसला सुरक्षित कर लिया गया है, अगली सुनवाई 26 मई को होगी. जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच अगली सुनवाई 26 मई को तय की है. गिर्राज सिंह देवंदा और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने इस मामले में अवमानना याचिका दायर की है. याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रेमचंद देवंदा और पुनीत सिंघवी ने पैरवी की.

लोग परेशान हैं, सिस्टम बेहाल- संयम लोढ़ा

सरकार की ओर से दलील दी गई थी राजस्थान का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी है, जून में हीटवेव चलती है, जुलाई में बरसात शुरू हो जाती है और ऐसे में चुनाव कराना मुश्किल होगा, लेकिन बेंच ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया था. वहीं, पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, "राजस्थान की जनता पंचायत और नगर पालिका के वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित है. चुनाव ना हो पाने के कारण प्रदेश की पंचायतों और निकायों में अव्यवस्था है. स्थानीय स्तर पर काम अटक रहे हैं. लोग परेशान है, सिस्टम बेहाल है. सरकार गर्मी और बारिश का तर्क दे रही है. स्कूलों में एडमिशन की भी दलील दी है. लेकिन हमने अवमानना याचिका दायर की है. इस पर पहले कोर्ट की ओर से नोटिस भी जारी हुए हैं."

11 मई की सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी फटकार

11 मई को हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने नाराजगी भी जाहिर की थी. कोर्ट ने तय समय पर चुनाव नहीं कराने पर फटकार लगाते हुए कहा था कि सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उसे पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है.

सरकार ने हाईकोर्ट फैसले को भी बताया था वजह 

कोर्ट में सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से देरी हुई. जबकि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय नहीं हो पाया. बेंच ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदेश निकायों को लेकर था. पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए, और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह हमारे सामने नहीं है.

यह भी पढ़ेंः कब जारी होगा प्राइमरी टीचर भर्ती का रिजल्ट? RSSB अध्यक्ष ने दी लाइब्रेरियन-वीडीओ एग्जाम से जुड़ी बड़ी अपडेट


 

Rajasthan.NDTV.in पर राजस्थान की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार, लाइफ़स्टाइल टिप्स हों, या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें, सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Close