आरजीएचएस योजना में कथित गड़बड़ी को लेकर दो चिकित्सकों की गिरफ्तारी से विवाद हो गया है. एसओजी की कार्रवाई के बाद सीकर के डॉक्टरों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. इसका असर सीधे स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखाई देने लगा है. एसके अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल और एक डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े डॉ. बी. लाल को एसओजी ने गिरफ्तार किया था. चिकित्सकों का आरोप है कि बिना पड़ताल के कार्रवाई की गई है. संयुक्त चिकित्सक संघर्ष समिति के आह्वान पर डॉक्टर एकजुट हुए. राजकीय एसके अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद है. निजी अस्पतालों में भी सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी बंद रहेगी.
इंटर्न ने संभाला मोर्चा
हालांकि, मरीजों के लिए इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गईं. इस बीच, रेजिडेंट डॉक्टर और इंटर्न ने मोर्चा संभाला है. लेकिन नियमित ओपीडी सेवाएं बंद रहने से बड़ी संख्या में मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी. चिकित्सक संगठनों का कहना है कि बिना निष्पक्ष और विस्तृत जांच के इस तरह की कार्रवाई चिकित्सकों का मनोबल गिराती है. गिरफ्तारी की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है.

सीकर के चिकित्सक संगठन एकजुट होकर एसओजी की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं.
डॉक्टरों की रिहाई नहीं तो तेज होगा आंदोलन
बीती शाम अरिस्दा, आईएमए, राजमेश और आरएमसीटीए की बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही डॉक्टरों की रिहाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन होगा. इस मामले में रणनीति शाम की बैठक में तय की जाएगी. अब यह मामला अब केवल दो चिकित्सकों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है. बल्कि डॉक्टर और प्रशासन के बीच तकरार का प्रकरण बन गया है. प्रशासनिक कार्रवाई और पारदर्शिता जैसे बड़े सवालों को भी केंद्र में ले आया है.
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