Rajasthan News: राजस्थान के धौलपुर जिले में महिला अत्याचार और पॉक्सो एक्ट का दुरुपयोग करने वालों पर पुलिस प्रशासन ने अब सख्त शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान के नेतृत्व में जिले में 'जीरो टॉलरेंस' नीति लागू की गई है. अब पुलिस सिर्फ झूठे मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट (FR) लगाकर फाइल बंद नहीं करेगी, बल्कि ऐसे मामले दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी कानूनी डंडा चलेगा.
चार माह में मिले 86 फर्जी मामले
जिले में बढ़ते फर्जी मुकदमों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने विशेष अभियान छेड़ा है. जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक महिला अत्याचार के 249 मामले दर्ज हुए थे. गहन जांच में इनमें से 86 मामले पूरी तरह से फर्जी पाए गए. पुलिस के अनुसार, कुछ लोग निजी रंजिश, ब्लैकमेलिंग या निर्दोषों को प्रताड़ित करने की मंशा से पुलिस और न्यायपालिका के बहुमूल्य समय को बर्बाद कर रहे हैं.
शिकायतकर्ता पर होगी कानूनी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में शिकायत झूठी साबित होती है, तो पुलिस न्यायालय में एफआर पेश करने के साथ ही उस शिकायतकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत इस्तगासा दायर करेगी. हाल ही में महिला थाना धौलपुर के एक मामले में पुलिस ने ऐसी ही कार्रवाई की है, जहां दुष्कर्म और मारपीट के आरोप असत्य पाए जाने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
पुलिस की आमजन से अपील
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से स्पष्ट आह्वान किया है कि कानून का उपयोग न्याय पाने के लिए करें, न कि प्रतिशोध लेने के लिए. झूठी शिकायतों से पुलिस तंत्र पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है, जिससे वास्तविक पीड़ितों को मिलने वाली मदद में देरी होती है. धौलपुर पुलिस ने चेतावनी दी है कि निर्दोषों को फंसाने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा.
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