दिव्यांग छात्रा को मेरिट में पहले स्थान के बावजूद दिल्ली एम्स ने नहीं दिया एडमिशन, कोर्ट ने लगाई फटकार

छात्रा को करंट लग गया था. इस वजह से उसकी दो अंगुलियों में स्थायी दिव्यांगता हो गई थी. लेकिन प्रवेश के समय मेडिकल कमेटी ने उसे अपात्र घोषित कर दिया.

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राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट यूजी-2025 के दिव्यांग कोटे में मेरिट में पहले स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश देने का आदेश दिया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभ्रा मेहता की खंडपीठ ने वैष्णवी अग्रवाल की अपील पर यह फैसला सुनाया. अपील में बताया गया कि छात्रा को दाएं हाथ की दो अंगुलियों में स्थायी दिव्यांगता हो गई थी. इस कारण उसने दिव्यांग कोटे में नीट यूजी-2025 के लिए आवेदन किया और इस वर्ग में पहला स्थान हासिल किया. बावजूद इसके, एम्स-दिल्ली ने उसे अयोग्य बताते हुए एडमिशन से इनकार कर दिया. 

इस वजह से एडमिशन देने से किया था इनकार

दरअसल, छात्रा को करंट लग गया था. इस वजह से उसकी दो अंगुलियों में स्थायी दिव्यांगता हो गई थी. लेकिन प्रवेश के समय एसएमएस अस्पताल की मेडिकल कमेटी ने उसे अपात्र घोषित कर दिया. मेडिकल कमेटी की ओर से तर्क दिया गया कि छात्रा दिव्यांगता के कारण चिकित्सा कार्य नहीं कर सकती. फिर छात्रा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

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भले ही सत्र 2026-27 में एडमिशन मिले- कोर्ट

अदालत ने कहा कि यदि इस सत्र में सीट उपलब्ध नहीं है, तो उसे 2026 सत्र में सीट आवंटित की जाए. अदालत ने माना कि छात्रा वर्तमान में एम्स दिल्ली में प्रवेश के लिए पात्र है.

सफदरजंग हॉस्पिटल ने माना प्रवेश के लिए पात्र

अदालती निर्देश पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने छात्रा का परीक्षण किया. इसके बाद छात्रा को प्रवेश के लिए पात्र माना गया. इसके आधार पर अदालत ने एमबीबीएस में प्रवेश का आदेश दिया.

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