Rajasthan High Court: राजस्थान में साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं. वहीं डिजिटल अरेस्ट के मामले में रिटार्यड और वृद्ध लोगों को फंसाया जा रहा है. वहीं पुलिस इस मामले में संज्ञान ले रही है. लेकिन एक ऐसा मामला आया है जिसमें डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुई 83 साल की वृद्ध महिला को जबरन 10 लाख रुपये में समझौते के लिए मजबूर किया गया है. जबकि वृद्धा के साथ 80 लाख की ठगी हुई थी. अब इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट में राजस्थान डीजीपी और एसपी साइबर क्राइम को तलब किया है. जबकि इस मामले में राज्य सरकार को भी आदेश दिया गया है.
जस्टिस समीर जैन की अदालत ने आरोपी नवीन तेमानी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान डीजीपी और एसपी साइबर क्राइम को 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तलब किया है.
समझौते के बाद जमानत की याचिका पर कोर्ट ने की सुनवाई
आरोपी पक्ष ने दावा किया कि वृद्धा के साथ 10 लाख रुपये में समझौता हो गया है, इसलिए जमानत दी जाए. लेकिन कोर्ट में मौजूद वृद्धा ने बताया कि जांच एजेंसी से न्याय न मिलने की हताशा में उन्हें 80 लाख की ठगी के दावे को मात्र 10 लाख में समेटने के लिए विवश किया जा रहा है.
अदालत ने मामले को विशिष्ट बताते हुए कहा कि यह इस कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है. 83 वर्षीय अजमेर निवासी महिला व्हीलचेयर पर दिव्यांग भतीजे के साथ कोर्ट में हाजिर हुईं, जो जीवन के अंतिम चरण में पूरी तरह अकेली हैं और कोई करीबी रिश्तेदार नहीं. कोर्ट ने इन्हें सफेदपोश साइबर अपराध का असहाय शिकार माना.
राज्य सरकार को दिया गया आदेश
राज्य सरकार को आदेश दिया गया कि यदि वृद्धा मुकदमे के सिलसिले में शहर में ठहरना चाहें, तो उच्च गुणवत्ता वाले आवास, भोजन की व्यवस्था करे और पूरा खर्च वहन करें. किसी कोताही पर कोर्ट गंभीर कदम उठाएगा. जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने और सरकारी वकील को सभी दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया.
सरकारी वकील विवेक शर्मा के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के जरिए 80 लाख रुपये ठगे गए, जो लेयर अकाउंट्स से दुबई के विभिन्न खातों में ट्रांसफर हो गए. पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी, लेकिन आरोपी दुबई में होने से गिरफ्तारी नहीं हो सकी.
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