Rajasthan: 11 साल से अधूरी करौली की उड़ान, 74 बीघा जमीन के बाद भी हवाई पट्टी का इंतजार

राजस्थान के करौली जिले की हवाई पट्टी की मांग फिर तेज हो गई है. 11 साल पहले जमीन आवंटन के बावजूद निर्माण नहीं हुआ. अब बजट 2026–27 में 60 करोड़ की स्वीकृति की उम्मीद से जनता की नजरें सरकार पर टिकी हैं.

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राजस्थान के करौली जिले की हवाई पट्टी की मांग फिर तेज हो गई है

Rajasthan News: राजस्थान के करौली जिले में हवाई पट्टी निर्माण की मांग एक बार फिर चर्चा में है. जिला बनने के करीब तीन दशक बाद भी करौली को हवाई सुविधा नहीं मिल पाई है. वर्ष 2013–14 में हवाई पट्टी के लिए 74 बीघा जमीन आवंटित होने के बावजूद आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है.

बजट में 60 करोड़ की मांग

करौली विधायक कार्यालय की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बजट 2026–27 में हवाई पट्टी निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का आग्रह किया गया है. पत्र में कहा गया है कि करौली जिला मुख्यालय पर स्थायी हवाई पट्टी की सख्त जरूरत है.

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पहले ही पूरी हो चुकी थी प्रक्रिया

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर नहर कठेरा क्षेत्र में खसरा नंबर 9388/1 की 74 बीघा भूमि हवाई पट्टी के लिए आवंटित की गई थी. उस समय सर्वे और सीमा ज्ञान जैसी औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई थीं. इसके बाद फाइलें आगे नहीं बढ़ीं और परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई.

आपात स्थिति में बड़ी परेशानी

करौली में हवाई पट्टी नहीं होने से वीआईपी और वीवीआईपी दौरों के दौरान अस्थायी हेलीपैड बनाना पड़ता है जिस पर हर बार लाखों रुपये खर्च होते हैं. मेडिकल इमरजेंसी के समय गंभीर मरीजों को सड़क मार्ग से जयपुर या दिल्ली ले जाना पड़ता है जिससे कीमती समय नष्ट हो जाता है.

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

करौली धौलपुर टाइगर रिजर्व बनने के बाद जिले में पर्यटन की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं. हवाई सुविधा मिलने से देश और विदेश से पर्यटक आसानी से करौली पहुंच सकेंगे. इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.

ट्रिपल इंजन सरकार से उम्मीद

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब राज्य में भजनलाल सरकार केंद्र में मोदी सरकार और स्थानीय विधायक भी सत्तारूढ़ दल से हैं. ऐसे में इसे ट्रिपल इंजन सरकार का अवसर माना जा रहा है. जनता चाहती है कि हवाई पट्टी को केवल वीआईपी सुविधा नहीं बल्कि विकास और जनहित की जरूरत मानते हुए जल्द निर्माण शुरू किया जाए. करौली के लोग पूछ रहे हैं कि क्या 11 साल से रुकी यह उड़ान अब पूरी होगी या यह सपना एक बार फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा.

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