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जन्माष्टमी से लेकर रामदेव जयंती-तेजा दशमी तक... त्योहारों के बीच होंगे राजस्थान के निकाय चुनाव

राजस्थान निकाय चुनाव-2026 की तारीखों के बीच ही कई पर्व भी हैं. ऐसे में चुनावी गतिविधियों पर पड़ने वाले असर से जोड़कर देखा जा रहा है.

जन्माष्टमी से लेकर रामदेव जयंती-तेजा दशमी तक... त्योहारों के बीच होंगे राजस्थान के निकाय चुनाव
अक्सर ही इस महीने में राजस्थान में धार्मिक-सामाजिक आयोजनों की व्यस्तता रहती है.

राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव का कार्यक्रम जारी होने के साथ ही चुनावी हलचल तेज हो गई है. प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव में करीब 1.44 करोड़ वोटर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को होगा, जबकि वोटों की गिनती 14 सितंबर को की जाएगी. लेकिन चुनाव कार्यक्रम आने के साथ ही त्योहारों और चुनावी तारीखों के टकराव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. खास बात यह है कि चुनाव प्रक्रिया के कई महत्वपूर्ण पड़ाव ऐसे दिनों में रखे गए हैं, जब राजस्थान में धार्मिक और सामाजिक आयोजनों की व्यस्तता रहती है.

27 अगस्त से शुरू होगी चुनावी प्रक्रिया

राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 27 अगस्त को लोक सूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी. इसके बाद उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने और चुनावी तैयारियों के लिए सीमित समय मिलेगा. 3 सितंबर नाम वापसी की अंतिम तारीख रखी गई है. इसके बाद चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे और मतदान की तैयारी अंतिम दौर में पहुंचेगी. 

जन्माष्टमी के दिन चुनाव चिह्न आवंटन

चुनाव कार्यक्रम के चर्चा वाले पहलू में चार सितंबर की तारीख भी शुमार है. राजस्थान सरकार की आधिकारिक अवकाश लिस्ट के मुताबिक इस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की छुट्टी है. इसी दिन निकाय चुनाव में चुनाव चिह्न आवंटन का कार्यक्रम रखा गया है. यानी एक तरफ राजनीतिक दल और प्रत्याशी चुनावी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण में होंगे, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग जन्माष्टमी के धार्मिक आयोजनों में व्यस्त रहेंगे. शहरों और कस्बों में मंदिरों, झांकियों, शोभायात्राओं के आयोजन के चलते प्रशासन और स्थानीय कार्यकर्ताओं के सामने अतिरिक्त व्यवस्थाओं की चुनौती भी रह सकती है.

3 सितंबर को नाम वापसी, थदड़ी मनाएगा सिंधी समाज

नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 3 सितंबर है. राजस्थान सरकार के साल 2026 कैलेंडर में 3 सितंबर को थदड़ी को ऐच्छिक अवकाश के रूप में दर्ज किया गया है. यह पर्व विशेष रूप से सिंधी समाज में महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लिए यह सवाल चर्चा में है कि क्या त्योहारों के दौरान चुनावी गतिविधियों के कारण राजनीतिक भागदौड़ और सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल होगा?

14 सितंबर को मतगणना, उसी दिन गणेश चतुर्थी

सबसे अहम संयोग 14 सितंबर को लेकर सामने आता है. आयोग ने निकाय चुनाव की मतगणना इसी दिन तय की है. वहीं सरकारी कैलेंडर में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को ऐच्छिक अवकाश के रूप में रखा गया है. इसके चलते मतगणना केंद्रों, कर्मचारियों, प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के लिए दिन खासा व्यस्त रहने वाला है. जहां एक तरफ चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर होंगी, वहीं गणेश चतुर्थी के धार्मिक आयोजन भी होंगे.हालांकि, गणेश चतुर्थी पर गवर्मेंट हॉलिडे नहीं है, लेकिन बड़े आयोजनों के चलते पुलिस के लिए मतगणना केंद्रों, उसके आसपास और धार्मिक आयोजनों की जगह पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभालना होगा. 

21 सितंबर को अध्यक्ष पद का चुनाव, रामदेव जयंती और तेजा दशमी भी

चुनावी कार्यक्रम का सबसे बड़ा सवाल 21 सितंबर को लेकर उठ रहा है. इसी दिन निकायों के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव निर्धारित किया गया है. दूसरी तरफ राजस्थान सरकार की आधिकारिक अवकाश सूची में 21 सितंबर को रामदेव जयंती, तेजा दशमी और खेजड़ली शहीद दिवस की छुट्टी है. छुट्टी पर चुनाव से जुड़े कर्मचारियों का काम करना बड़ी बात नहीं है, लेकिन इस दिन दो बड़े त्योहारों के चलते समाज का बड़ा वर्ग इनमें व्यस्त रहता है. हालांकि एक तर्क यह भी है कि कर्मचारियों के अलावा अध्यक्षीय चुनाव में सिर्फ पार्षदों और कुछ राजनेताओं की ही भूमिका रहती है.

सीधे तौर पर यह आम वोटर से जुड़ा प्रत्यक्ष चुनाव नहीं है.इसके बावजूद राजस्थान के सामाजिक और धार्मिक जीवन में रामदेव जयंती और तेजा दशमी का खास महत्व है. प्रदेश के कई हिस्सों में इस दिन बड़े मेले, धार्मिक कार्यक्रम और स्थानीय स्तर पर बड़े आयोजन होते हैं. ऐसे में अध्यक्ष पद के चुनाव की तारीख इसी दिन पड़ने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठना शुरू हो गया है.

चुनाव तारीखों को लेकर हो रही चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू आम वोटर और उसकी चुनावी भागीदारी से जुड़ा है. त्योहारों के दौरान कई परिवार धार्मिक आयोजनों, यात्राओं या पारिवारिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इसका चुनावी गतिविधियों पर कोई असर पड़ेगा?

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग के सामने प्रदेश के सभी 309 नगरीय निकायों में एक साथ चुनावी प्रक्रिया संचालित करने की बड़ी प्रशासनिक चुनौती है. चुनाव कार्यक्रम तैयार करते समय मतदान केंद्र, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की उपलब्धता, मतगणना केंद्र और अन्य प्रशासनिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ता है. इस लिहाज से त्यौहार और उस पर चुनावी तारीखों की चर्चा लोगों में हो सकती है, लेकिन  केवल त्योहार की तारीख के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.

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