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'जो बूथ नहीं जीत सकता, वो नेता नहीं' गहलोत-पायलट विवाद के बीच पूर्व मंत्री का बयान

अशोक गहलोत के राज में मंत्री रहे परसादी लाल मीणा ने सोमवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जो नेता बूथ नहीं जीत सकता, वह नेता ही नहीं है.

'जो बूथ नहीं जीत सकता, वो नेता नहीं' गहलोत-पायलट विवाद के बीच पूर्व मंत्री का बयान
गहलोत-पायलट विवाद के बीच पूर्व मंत्री का बयान

अशोक गहलोत के सचिन पायलट को लेकर हालिया बयान से राजस्थान की राजनीति गरमाई हुई है. पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का पायलट पर ऐसे समय में बयान आया, जब राजस्थान कांग्रेस में बड़े बदलाव की चर्चा है. इसी बीच दौसा में जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाद पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा ने बड़ा बयान दिया है. पूर्व मंत्री मीणा ने बूथ स्तर पर फोकस की बात करते हुए कहा कि अध्यक्ष नहीं बूथ विजेता ही नेता है. इस दौरान उन्होंने मानेसर प्रकरण पर भी बेबाक जबाव दिया है. 

बूथ स्तर पर काम करने का संदेश

जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक के बाद पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा ने बातचीत करते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह नवगठित जिला कार्यकारिणी की पहली बैठक थी, जिसमें पूरे जिले में संगठन को ग्राम पंचायत और बूथ स्तर तक सशक्त बनाने की रणनीति तैयार की गई है. मीणा ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस में अब वही नेता माना जाएगा, जो बूथ जीतकर दिखाएगा.

उन्होंने राहुल गांधी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि जो नेता बूथ नहीं जीत सकता, वह नेता ही नहीं है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और संगठन को सघन अभियान के तहत मजबूत करने की बात कही. गहलोत-पायलट विवाद पर पूछे गए सवाल को टालते हुए मीणा ने कहा कि बैठक संगठन से जुड़ी है और उसी पर सवाल पूछे जाएं.

डोटासरा-जूली की टीम पर क्या बोले परसादी लाल मीणा

उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और अपनी-अपनी बात रखते हैं, अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व करता है. प्रदेश नेतृत्व को लेकर उन्होंने कहा कि यह निर्णय राहुल गांधी का अधिकार क्षेत्र है. वहीं, गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली की टीम की सराहना करते हुए मीणा ने कहा कि राजस्थान संगठन का मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक है. 

मानेसर प्रकरण से जुड़े सवाल पर उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि सरकार बच गई ना, अब यह पुरानी बात हो चुकी है. बैठक में कांग्रेस नेताओं ने एकजुट होकर संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने और आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की रणनीति पर जोर दिया.

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