Rajasthan Politics: वागड़ की राजनीति में भूचाल की आहट, लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम सकते हैं कांग्रेस के कद्दावर नेता

Rajasthan Politics: लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान की राजनीति में भूचाल की आहट सुनाई पड़ रही है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के कद्दावर नेता भाजपा का दामन सकते हैं. चर्चा है कि एक-दो दिनों में कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और विधायक रहे पार्टी के दिग्गज नेता भाजपा में शामिल हो जाएंगे.

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लोकसभा चुनाव से पहले वागड़ की राजनीति में भूचाल की आहट. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Rajasthan Politics: लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल बनने लगा है. बड़े नेताओं के पाला बदलने की सिलसिला जारी है. हाल ही में महाराष्ट्र में कांग्रेस के दो बड़े नेताओं ने भाजपा और शिवसेना ज्वाईन किया है. अब राजस्थान में भी ऐसा कुछ होने की संभावना जताई जा रही है. प्रदेश के वागड़ क्षेत्र के दो जिलों बांसवाड़ा और डूंगरपुर की राजनीति में दो दिन से तूफान से पहले वाली शांति नजर आ रही है. एक-दो दिन में यह शांति कभी भी एक बड़े तूफान में तब्दील हो सकती है. जब कांग्रेस के कद्दावर नेता कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा ज्वाइन करेंगे.

लोकसभा चुनाव समीप आने के साथ ही वागड़ में टिकट की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. भाजपा में वर्तमान सांसद सहित अन्य दावेदार दम ठोक रहे हैं, जो विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित रहे. वहीं कांग्रेस को दोनों जिलों में पहचाने जाने वाले चेहरे की तलाश है. 

कांग्रेस विधायक और CWC सदस्य महेन्द्रजीत सिंह मालवीय को लेकर चर्चाएं तेज

कांग्रेस में टिकट दोनों जिलों में बारी-बारी से दिया जाता है. इस बार बांसवाड़ा की बारी है. यहां बड़े चेहरे के रूप में सरपंच से लेकर वर्तमान में बागीदौरा विधायक और CWC सदस्य महेन्द्रजीत सिंह मालवीय (Mahendrajeet Singh Malviya) हैं. वे खुद चुनाव नहीं लड़ने की बात तो कह चुके हैं. लेकिन बीते कुछ दिनों से वो कांग्रेस से नाराज बताए जा रहे हैं. इस बीच उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात भी की. जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई है. 

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नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे मालवीय

मालूम हो कि कांग्रेस विधायक महेंद्रजीत मालवीय ने गुरुवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की थी. जिसके बाद वागड़ की राजनीति में भूचाल की आहट सुनाई पड़ रही है. सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं और उस हवा को बल मिल रहा है जिसमें यह बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाने से नाराज चल रहे मालवीय भाजपा का दामन थाम सकते हैं.
 

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मालवा और गुजरात से सटे इस लोकसभा क्षेत्र में इन सवालों और चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या वे पार्टी बदल रहे हैं? यदि ऐसा हुआ तो यह वागड़ की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर होगा.

आदिवासी पार्टी खड़ी कर सकती है मुश्किलें

विगत दो चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस के परंपरागत गढ़ को काफी हद तक ढहाया है. बांसवाड़ा जिले की पांच और डूंगरपुर की तीन सीटों वाले इस बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट पर गत चुनाव में बीटीपी ने ढाई लाख से अधिक वोट पहली बार में हासिल किए, वहीं नवंबर में विधानसभा चुनाव में बीएपी ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराकर 8 सीटों पर पौने पांच लाख वोट हासिल किए. विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में बीएपी कड़ी टक्कर देने की तैयारी में जुटी है.

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डूंगरपुर-बांसवाड़ा से भाजपा बदल सकती है प्रत्याशी

विधानसभा चुनाव में चार सीट पर पराजय से भाजपा को बड़ा झटका लगा. इसके बाद भी राम मंदिर, मोदी मैजिक और मोदी की गारंटी के बूते भाजपा चुनावी वैतरणी पार करने की पूरी उम्मीद बांधे हुए है. वहीं चार सीट पर जीत के बाद कांग्रेस में उत्साह रहा, किंतु पार्टी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से उबर नहीं पाई है.

इधर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महेंद्र जीत मालवीय सीएम भजनलाल से मुलाकात के बाद कल दिल्ली जाने वाले हैं. जहां को भाजपा का दामन थाम सकते हैं. मालूम हो कि मालवीय गहलोत सरकार में दो बार मंत्री रहे हैं. भाजपा उन्हें डूंगरपुर-बांसवाड़ा से लोकसभा का उम्मीदवार बना सकती है. जहां से अभी कनकमल कटारा सांसद हैं. 


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