राजस्थान के 6 छात्रों को साइबर फ्रॉड नेटवर्क चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. ये लोग श्रीसोमनाथ ट्रस्ट के गेस्ट हाउस में रहने की जगह ढूंढने वाले तीर्थयात्रियों को टारगेट करते थे. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. स्टेट साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने यह कार्रवाई तब की जब तीर्थयात्रियों से कई शिकायतें मिलीं. तीर्थयात्रियों ने दावा किया कि उन्होंने सोमनाथ में सागर दर्शन गेस्ट हाउस, माहेश्वरी गेस्ट हाउस और लीलावती गेस्ट हाउस में कमरे बुक किए थे, लेकिन ट्रस्ट के सिस्टम में उनके रिजर्वेशन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला.
नकली वेबसाइट की पहचान की
ट्रस्ट सिर्फ अपनी ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए बुकिंग की इजाजत देता है, और उसने किसी भी थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म को ऑथराइज नहीं किया है. टेक्निकल जांच के दौरान, अधिकारियों ने ऑफिशियल सोमनाथ बुकिंग पोर्टल जैसी दिखने वाली चार नकली वेबसाइट की पहचान की. अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों ने गेस्ट हाउस की असली वेबसाइट के लेआउट, लोगो और तस्वीरों की नकल की थी, और उन्हें असली दिखाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल करके उनमें बदलाव किया था.
नकली साइटों पर मोबाइल नंबर दिखाए
नकली साइटों पर आरोपियों द्वारा चलाए जा रहे मोबाइल नंबर दिखाए गए थे, और यूजर्स को क्यूआर कोड, यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए एडवांस पेमेंट करने के लिए कहा गया था. कई मामलों में ऑनलाइन पूजा या डोनेशन के लिंक पर क्लिक करने के बाद पीड़ितों को रीडायरेक्ट भी किया गया.
आरोपियों ने नकली वेबसाइट का कराया प्रमोशन
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने नकली वेबसाइट को गूगल सर्च रिजल्ट में खास तौर पर दिखाने के लिए पेड ऑनलाइन प्रमोशन का इस्तेमाल किया. उन्होंने कथित तौर पर पीड़ितों को कॉल और सर्विस के ओरिजिन के बारे में गुमराह करने के लिए लोकेशन बदलने वाले एप्लिकेशन का भी इस्तेमाल किया. पेमेंट मिलने के बाद, ग्रुप ने शिकायत करने वालों को एआई से बनी बुकिंग रसीदें भेजीं. पीड़ितों को गेस्ट हाउस पहुंचने पर ही धोखाधड़ी का पता चला.
5 महीने से चला रहे थे नेटवर्क
टेक्निकल सर्विलांस से पता चला कि यह ऑपरेशन राजस्थान के जयपुर में एक किराए की प्रॉपर्टी में चल रहा था, जहां 6 आरोपी कथित तौर पर करीब 5 महीने से नेटवर्क चला रहे थे. गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सचिन हरसाना, अभिषेक उपाध्याय, राजकुमार प्रताप, शेरसिंह, माधव गुर्जर और विष्णुकुमार अवतार के रूप में हुई है. पुलिस ने बताया कि सभी आरोपी कॉलेज स्टूडेंट हैं.
एआई की मदद से बनाया नकली वेबसाइट
एसपी राजदीपसिंह जाला ने कहा, "गुजरात के मशहूर सोमनाथ मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को टारगेट करके साइबर फ्रॉड का एक मामला सामने आया है. डिटेल्ड टेक्निकल एनालिसिस करने के बाद, पुलिस ने जयपुर, राजस्थान से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया. आरोपियों ने भरोसेमंद दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाने के लिए एडवांस्ड एआई टूल्स का इस्तेमाल किया. उन्होंने ओरिजिनल साइट से फोटो और डिजाइन कॉपी किए, उनमें बदलाव किए, नकली कॉन्टैक्ट नंबर जोड़े और क्यूआर कोड के जरिए सीधे अपने अकाउंट में पैसे जमा किए."
साइबर फ्रॉड की शिकायतों के लिंक मिले
जाला ने आगे बताया कि आरोपियों द्वारा खोले गए बैंक अकाउंट के एनालिसिस और डिजिटल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की जांच से देश भर में 90 से ज्यादा साइबर फ्रॉड की शिकायतों के लिंक मिले. इनमें से 1930 पोर्टल और समन्वय पोर्टल के जरिए मिली शिकायतों के आधार पर गुजरात में 43, महाराष्ट्र में 16, उत्तर प्रदेश में 8, राजस्थान में 5, पंजाब में 3 और कर्नाटक, हरियाणा और दिल्ली में 3-3 शिकायतें दर्ज की गईं.
लगभग 20 लाख रुपये की ठगी का अनुमान
अधिकारियों का अनुमान है कि अकेले सोमनाथ गेस्ट हाउस से जुड़ी नकली वेबसाइटों के ज़रिए लगभग 20 लाख रुपये की ठगी की गई. दूसरे धार्मिक स्थलों से जुड़ी धोखाधड़ी में शामिल कुल रकम की जांच की जा रही है. पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने वृंदावन, काशी विश्वनाथ और नाथद्वारा में इस्कॉन के नाम पर भी नकली बुकिंग वेबसाइट बनाई थीं.
अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे ऑनलाइन पेमेंट करने से पहले वेबसाइटों की सच्चाई वेरिफाई करने के लिए सिर्फ श्री सोमनाथ ट्रस्ट की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ही रहने की बुकिंग करें.
यह भी पढ़ें: जयपुर से जैसलमेर तक तपने लगा राजस्थान, 48 घंटों में 3 डिग्री और बढ़ेगा तापमान, जानें आपके शहर का हाल