
CM Bhajan Lal Sharma News: पूरा राजस्थान इस समय भीषण गर्मी से झुलस रहा है. दोपहर के बाद लोग घरों में छुपने के लिए मजबूर हो गए हैं. राज्य में अब तक गर्मी से कई लोगों की मौत हो चुकी है, राज्य सरकार भी बिना देरी के एक्शन मोड में आ गई है. इसी कड़ी में सीएम लगातार प्रदेश में भीषण गर्मी के हालातों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे है. और वर्तमान में जारी भीषण हीट वेव से आमजन को राहत प्रदान करने के लिए अधिकारियों के साथ प्लान तैयार किया है. इसी को लेकर राजधानी से लेकर हर जिले के आमजन को पर्याप्त बिजली- पानी की सुविधाओं, गर्मी और लू से राहत दिलाने के लिए सीएम ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है, जिससे वे लगातार कंटिजेंसी प्लान को अमल में लाने लिए फील्ड में डटे हुए हैं.
भीषण गर्मी से बिगड़ते हालातों पर सीएम ने सीएस से की चर्चा
इसी के प्रदेश में भीषण गर्मी से बिगड़ते हालातों पर सीएम ने शुक्रवार को मुख्य सचिव सुधांश पंत के साथ चर्चा की. साथ ही जनता स्वस्थ विभाग से लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सभी डिस्कॉम सहित पशुपालन और गोपालन विभागों में निरंतर मॉनिटरिंग रखते हुए सक्रियता से काम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने प्रदेश में आमजन से लेकर पशुधन को गर्मी से राहत दिलाने के लिए सभी विभागों को उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए. साथ ही कहा कि प्राथमिकता से भीषण गर्मी और लू-प्रकोप संबंधी प्रबंधन कार्यां को समय से पूरा करें और निरंतर इसकी समीक्षा भी करें.
आमजन से मुख्यमंत्री ने की अपील
प्रचंड गर्मी के हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील की है. जिसमें उन्होंने कहा है कि लू के प्रकोप से बचने के लिए विशेषकर बच्चे और बुजुर्ग दोपहर में बाहर निकलने से परहेज करें. साथ ही हीटवेव से बचाव के लिए चिकित्सकीय एडवाइजरी का पालन करें. इसके अलावा बिजली और पानी का भी समझदारी से उपयोग करने की अपील की है, जिससे अधिक मांग के समय बिजली ट्रिपिंग जैसी घटनाओं का सामना नहीं करना पड़े.
नोडल अधिकारी कर रहे मौसमी बीमारियों की मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने मौसमी बीमारियों और हीटवेव संबंधी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं. वहीं, अस्पतालों में मरीजों के लिए कूलर, एसी, वाटर कूलर, दवा सहित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। प्रदेश के जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक केन्द्रों पर गेप एनालिसिस करते हुए व्यवस्थाएं दुरूस्त की गई है.
phed के साथ मिलकर गौवंश के लिए पानी की व्यवस्था
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर गोपालन विभाग ने समस्त जिला कलक्टर और जिला स्तरीय गोपालन समिति के अध्यक्ष को जिलों में संचालित गौशालाओं में गौवंश के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और अन्य जल प्रदाता एजेंसी के सहयोग से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं. साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर पशुपालन विभाग की ओर से गौशालाओं में गौवंश की चिकित्सा के लिए आपातकालीन औषधियां एवं सर्जिकल उपकरण खरीदने के लिए जिलों को एक-एक लाख रुपये का बजट भी उपलब्ध कराया गया है.
कंट्रोल रूम किया स्थापित
पेयजल आपूर्ति के दौरान डायरेक्ट बूस्टर लगाने के कारण कुछ क्षेत्रों में अंतिम छोर के उपभोक्ताओं को पेयजल की सही मात्रा में प्राप्ति में समस्या उत्पन्न हो रही है. इन क्षेत्रों में विद्युत विभाग ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया है. इसके लिए उन्होंने विद्युत आपूर्ति को बंद करने के विकल्पों का अध्ययन किया है. इसके तहत, जिला प्रशासन की सहायता से विद्युत आपूर्ति को बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है. यह एक उपाय है जिससे पेयजल उपलब्धता में सुधार हो सकता है.
पेयजल परिवहन की जीपीएस आधारित मॉनिटरिंग
मुख्यमंत्री ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में पेयजल व्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखें। इसके लिए विभाग के जरिए पेयजल परिवहन की जीपीएस/ओटीपी आधारित मॉनिटरिंग की जाए. साथ ही विभाग के जरिए फील्ड टेस्टिंग किट से पानी की गुणवता की जांच की हो. वहीं समस्त फील्ड अधिकारियों को सप्लाई के समय प्रेशर एवं गुणवत्तता को चैक कर व्हाटसअप ग्रुप में फोटो डालने के निर्देश दिए गए है जिससे पता लगाया जा सके किन-किन फील्ड अधिकारियों के जरिए कितनी बार सप्लाई चैक की जा रही है. साथ ही पानी की आपूर्ति के लिए समस्याग्रस्त क्षेत्रों में नलकूप एवं हैंडपंप स्वीकृत किए गए हैं तथा इनके समय से निर्माण को सुनिश्चित करने के लिए ड्रिलिंग एवं जी.डब्लू.डी की रिंग मशीनों को तैनात करे. जिससे तय समय में इसका काम पूरा हो सके.
पेयजल आपूर्ति के दौरान विद्युत कटौती
जिन क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के दौरान डायरेक्ट बूस्टर लगाने के कारण उपभोक्ताओं को पेयजल की समस्या आ रही है. उन क्षेत्रों में बिजली विभाग से समन्वय स्थापित कर जिला प्रशासन की मदद से पेयजल आपूर्ति के दौरान आपूर्ति बंद करवाए जाने के विकल्प सुनिश्चित की जाए.
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