Rajasthan Vidhan Sabha Budget Session: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच माफी की मांग पर गतिरोध बरकरार है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) समेत 6 विधायकों के निलंबन के बाद पार्टी के सदस्यों ने सदन के पूरे सत्र का बहिष्कार कर दिया है. अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कल (27 फरवरी) नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) विधानसभा में अपना पक्ष रखेंगे? गतिरोध समाप्त नहीं होने की स्थिति में अगर विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहता है तो ऐसा संभव नजर नहीं आ रहा है. अगर ऐसा होता है तो यह दूसरा अहम मौका होगा, जब जूली वक्तव्य नहीं दे पाएंगे. इससे पहले भी राज्यपाल के अभिभाषण पर जूली अपना पक्ष नहीं रख पाएंगे.
राज्यपाल के अभिभाषण के दिन भी हुआ था हंगामा
पिछले महीने 31 जनवरी को राजस्थान की 16वीं विधानसभा के तीसरा सत्र की शुरुआत हुई थी. पहले दिन राज्यपाल हरिभाऊ बागडे का अभिभाषण हुआ. सत्र की शुरुआत में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने आश्वासन दिया था कि कांग्रेस का कोई भी नेता इस दौरान सदन में हंगामा नहीं करेगा. लेकिन अभिभाषण पूरा होने तक विपक्ष के नेताओं ने 3 बार हंगामा किया.
पहली बार हंगामा आदिवासी क्षेत्रों में पानी देने की मांग और दूसरी बार हंगामा पिछली सरकार में हुए पेपरलीक के जिक्र पर हुआ. इसके बाद तीसरी बार हंगामा महाकुंभ के जिक्र पर भी हुआ. हालांकि राज्यपाल का अभिभाषण खत्म होने के बाद सदन ने टेबल थपथपाकर स्वागत किया.
सत्ता पक्ष इसे बता रहा डोटासरा और जूली के बीच मतभेद
वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से इसे डोटासरा और जूली के बीच मतभेद की तरह पेश किया जा रहा है. बीजेपी की ओर से लगातार बयान दिया जा रहा है, "डोटासरा नहीं चाहते हैं कि जूली अपना वक्तव्य रखें, इसी के चलते सदन में हंगामा किया गया." विपक्षी सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी इसी तरह का बयान दिया. उन्होंने विरोध के दौरान सदन में कांग्रेस के नेताओं के एकजुट होकर सामने आने को दिखावा बताया.
मंत्री ने कहा, "विधानसभा में जो घटनाक्रम चल रहा है ये प्रतिपक्ष के विधायक दल की अंदरूनी लड़ाई है कि उनमें कौन बड़ा नेता है. लोकतांत्रिक दृष्टि से सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष, और संगठन में प्रदेश अध्यक्ष बड़ा नेता होता है. इनको आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए."
यूडीएच मंत्री खर्रा ने डोटासरा पर उठाए सवाल
खर्रा ने सवाल करते हुए कहा, "कांग्रेस नेता मौके-बेमौके एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते हैं. शुक्रवार को जब नेता प्रतिपक्ष उस टिप्पणी के खिलाफ अपनी बात रख रहे थे, तो विधायकों को उछलकर आसन के सामने की क्या ज़रूरत थी?"
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