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रणथंभौर में टेरिटरी के लिए आपस में भिड़ीं मां-बेटी, टाइग्रेस रिद्धि और माही की लड़ाई देख कांप गए पर्यटक

रणथंभौर के राजबाग तालाब किनारे कुदरत का सबसे क्रूर चेहरा दिखा. जिस मां 'रिद्धि' ने शिकार करना सिखाया, वही अपनी बेटी 'माही' की जान की दुश्मन बन बैठी. आखिर इस वर्चस्व की जंग में कौन किस पर भारी पड़ा? देखिए रोंगटे खड़े कर देने वाला यह वीडियो.

रणथंभौर में टेरिटरी के लिए आपस में भिड़ीं मां-बेटी, टाइग्रेस रिद्धि और माही की लड़ाई देख कांप गए पर्यटक
रिद्धि T-124 के सामने ही डट गई उसकी अपनी बेटी, रणथंभौर में हुआ जबरदस्त संघर्ष
NDTV Reporter

Sawai Madhopur News: रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) के जंगल से एक ऐसी खबर आई है जिसने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं. सवाई माधोपुर स्थित इस नेशनल पार्क में मंगलवार को वर्चस्व और इलाके की जंग में एक मां और बेटी ही एक-दूसरे के सामने आ गईं. रणथंभौर की मशहूर टाइग्रेस रिद्धि (T-124) और उसकी बेटी माही (T-2404) के बीच हुई इस जबरदस्त भिड़ंत ने जंगल के सबसे क्रूर सच सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट (Survival Of The Fittest) को एक बार फिर दुनिया के सामने रख दिया है.

कैमरे में कैद हुआ मंजर

यह रोमांचक घटना रणथंभौर के जोन नंबर 3 में स्थित राजबाग तालाब के पास घटित हुई. 17 मार्च 2026 को सफारी पर निकले पर्यटकों ने देखा कि कैसे अचानक दोनों बाघिनों के बीच गर्जना के साथ हिंसक संघर्ष शुरू हो गया. अपनी ही संतान और मां के बीच इलाके के अधिकार को लेकर हुई इस लड़ाई को देखकर वहां मौजूद सैलानी सहम गए, हालांकि उन्होंने इस दुर्लभ नजारे को अपने कैमरों में कैद करने का मौका नहीं गंवाया.

स्वतंत्र पहचान स्थापित करने की कोशिश

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, रणथंभौर जैसे घने जंगल में बाघों के बीच टेरिटोरियल फाइट एक सामान्य व्यवहार है. दरअसल, रिद्धि की बेटी माही (T-2404) अब 'सब-एडल्ट' अवस्था में पहुंच चुकी है और अपनी स्वतंत्र पहचान व अलग इलाका स्थापित करने की कोशिश कर रही है. जब शावक बड़े होते हैं, तो वे अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते हैं, जिसमें कई बार उन्हें अपनी ही मां से टकराना पड़ता है.

वन विभाग की टीम रख रही है नजर

रणथंभौर की चर्चित टाइग्रेस रिद्धि (T-124) हमेशा से ही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है, लेकिन उसकी बेटी माही की बढ़ती सक्रियता और यह हालिया संघर्ष बताता है कि जंगल में अपनी विरासत बचाने के लिए हर बाघ को हर रोज लड़ना पड़ता है. फिलहाल इस संघर्ष के बाद वन विभाग की टीम बाघिनों की गतिविधियों पर नजर रख रही है.

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