रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बढ़ती बाघों की संख्या अब वन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. यही वजह है कि रणथंभौर वन विभाग ने बाघों को पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने के लिए एक नया टाइगर सफारी पार्क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है. वन विभाग ने इस प्रस्ताव को स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री डॉ. किरोडी लाल मीणा के माध्यम से केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय को भेज दिया है. प्रस्ताव में आईओसी की करीब 100 बीघा जमीन को रणथंभौर टाइगर रिजर्व के नाम हस्तांतरित करने की मांग की गई है.
क्यों जरूरी है नया सफारी पार्क?
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में वर्तमान में लगभग 76 बाघ, बाघिन और शावक हैं, जबकि वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के 2016 के सर्वे के अनुसार यहां केवल 45 से 55 बाघ ही रह सकते हैं. क्षमता से ज्यादा बाघों की वजह से युवा बाघ टेरिटरी की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर आसपास के गांवों में पहुंच रहे हैं, जिससे वन विभाग को भारी दिक्कतें हो रही हैं और स्थानीय लोगों में भी डर का माहौल है.
IOC प्लांट 24 साल से बंद पड़ा
डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि रणथंभौर से सटी हुई जमीन पर आईओसी का प्लांट पिछले पिछले 23-24 सालों से बंद पड़ा है और यहां प्राकृतिक जंगल भी मौजूद है. अगर यह जमीन रणथंभौर को मिल जाती है तो यहां एक बड़ा एनक्लोजर बनाया जा सकता है, जहां बूढ़े, कमजोर, बीमार और आपसी संघर्ष में घायल बाघों को सुरक्षित रखा जा सकेगा.
पर्यटकों को भी मिलेगा ऑप्शन
नए सफारी पार्क के बनने से न सिर्फ बाघों को पर्याप्त जगह मिलेगी, बल्कि रणथंभौर आने वाले पर्यटकों को सफारी के लिए एक अतिरिक्त विकल्प भी उपलब्ध हो जाएगा. इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिल सकेगा. फिलहाल रणथंभौर में सिर्फ एक छोटा एनक्लोजर है, जो एक हेक्टेयर क्षेत्र में बना हुआ है.
केंद्र की मंजूरी का इंतजार
वन विभाग ने प्रस्ताव भेजकर प्रक्रिया की दिशा में अहम कदम उठाया है. अब केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है. अगर प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो रणथंभौर के बाघों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगा और जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा.
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