रणथंभौर में सेटेलाइट कॉलर और सिम कैमरों से होगी बाघों की निगरानी, मिलेगा पल पल का अपडेट

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की लाइव ट्रैकिंग अब सैटेलाइट कॉलर और सोलर पावर्ड GSM कैमरों से की जाएगी. इसके लिए वन विभाग ने NTCA से परमिशन मांगी है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Ranthambore Tiger Reserve News
NDTV

Ranthambore Tiger Reserve News: राजस्थान के सबसे बड़े और 'बाघों की नर्सरी' कहे जाने वाले रणथंभौर टाईगर रिजर्व में अब बाघों की निगरानी आधुनिक तकनीक से की जायेगी. इसके लिए रणथंभौर टाईगर रिजर्व ने एनटीसीए से अनुमति मांगी है, अगर एनटीसीए से अनुमति मिल जाती है तो रणथंभौर के बाघों की मॉनिटरिंग अब जीएसएम कैमरों और सेटेलाइट सिस्टम के माध्यम से की जायेगी, जिससे ना सिर्फ बाघों की बेहतर मॉनिटरिंग हो पायेगी, बल्कि बाघों को लेकर वनाधिकारियों की भागदौड़ के साथ चिंता भी कम होगी. साथ ही आधुनिक तकनीकी से बाघों के पल पल के मूवमेंट की सटीक जानकारी भी मिलेगी 

रणथंभौर टाईगर रिजर्व
Photo Credit: NDtv

रणथंभौर में बढ़ रही बाघों की संख्या 

रणथंभौर टाईगर रिजर्व में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है, जिसके चलते रणथंभौर के कई बाघ टेरेटरी की तलाश में रिजर्व से बाहर बाहर निकल जाते है, जिनको ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है, हालांकि रणथंभौर में बाघों की मॉनिटरिंग और ट्रेकिंग को लेकर पहले से ही सर्विलांस सिस्टम लगा हुआ है, अभी थर्मल कैमरों के माध्यम से बाघों पर नजर रखी जाती है, लेकिन बावजूद इसके कई  बाघ रणथंभौर से बाहर निकल जाते है, जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता, ऐसे में अब  रणथंभौर वन प्रशासन बाघों की पल पल की मॉनिटरिंग और ट्रेकिंग के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने जा रहा है.

Advertisement

 8 से 10 बाघों के सेटेलाइट कॉलर लगाया जायेगा

रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने बताया की बाघों की मॉनिटरिंग के लिए रणथंभौर में जीएसएम कैमरे और सेटेलाइट तकनीकी का उपयोग करने का विचार बनाया गया है, अगर एनटीसीए से अनुमति मिलती है तो सबसे पहले 8 से 10 बाघों के सेटेलाइट कॉलर और जीएसएम कैमरा लगाया जायेगा ताकि बाघों के पल पल के मूवमेंट की जानकारी मिल सके, पहले से लगे सर्विलांस सिस्टम के थर्मल कैमरों को रिएक्टिवेट कर उन्हें आधुनिक बनाया जा रहा है, 

बाघों की मॉनिटरिंग
Photo Credit: NDtv

सौर उर्जा से रिचार्ज होंगे कैमरे 

बाघों की मॉनिटरिंग को मजबूत करने के लिए रणथंभौर में लगाये जाने वाले जीएसएम कैमरे आधुनिक तकनीक से लैस होंगे जो वायरलेस सर्विलांस पर चलते हैं, ये कैमरे इंटरनेट और वाई-फाई की बजाए सिम कार्ड के जरिए चलते हैं. जिन्हें आसानी से मोबाइल के जरिए ट्रैक किया जा सकता है, उनमें रिचार्जेबल बैटरी लगी रहती है जो सौर ऊर्जा से जुड़ी रहती है और सोलर पैनल से रिजार्च हो जाती है, इतना ही नहीं ये जीएसएम कैमरे रात के समय मे भी हाई क्वालिटी के वीडियो रिकॉर्डिंग करने में सक्षम होते हैं.  वनाधिकारी अपने मोबाइल पर एप के माध्यम से इन कैमरों की लाइव फुटेज देख सकते है जिससे बाघों की मॉनिटरिंग अच्छे से की जा सकती है.

यह भी पढ़ें: अजमेर: दोस्ती में 10 लाख का धोखा, पैसे मांगने पर दी धमकी, कहा- हड़पने की नीयत से ली थी रकम