मेरिट हासिल करने के बावजूद भी लिस्ट से नाम गायब! भर्ती परीक्षा का मामला हाईकोर्ट पहुंचा; बोर्ड ने दिया ये तर्क

कर्मचारी चयन बोर्ड ने पिछले साल 13 जून को यह भर्ती परीक्षा आयोजित की थी. इस एग्जाम में कुल 2783 पदों के लिए करीब 37 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.

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Rajasthan Recruitment Exam: राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने पशुधन सहायक भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की है. न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने राज्य सरकार, कर्मचारी चयन बोर्ड और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए प्रत्येक याचिकाकर्ता के लिए उनकी श्रेणी में एक-एक पद सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. कर्मचारी चयन बोर्ड ने हाल ही में दिसंबर में भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी किया था. इस परीक्षा में 2783 पदों के लिए करीब 37 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. भर्ती परीक्षा पिछले साल 13 जून को हुई थी. परीक्षा में याचिकाकर्ताओं ने मेरिट हासिल की, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के बाद उनके नाम अस्थायी सूची में रख दिए गए. याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान विश्वविद्यालय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान, बीकानेर (RAJUVAS) से डिप्लोमा इन एनिमल हसबेंड्री का डिप्लोमा पूरा किया था.

मेरिट में शामिल नहीं करने के पीछे ये तर्क

मेरिट में शामिल ना करने के लिए तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ताओं ने जिस संस्थान से डिप्लोमा किया, उसके पास राज्य सरकार की एनओसी नहीं थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कोर्ट में तर्क दिया कि अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की काउंसलिंग प्रक्रिया से प्रवेश लेकर डिप्लोमा प्राप्त कर चुके हैं. ऐसे में संस्थान-सरकार के प्रशासनिक विवाद का बोझ योग्य उम्मीदवारों पर नहीं डाला जा सकता. 

16 फरवरी को होगी अगली सुनवाई 

कोर्ट ने दिनेश कुमार मीणा, मनीषा, सुनील पटेल और नीरज कुमार मीणा, चारों याचिकाकर्ताओं के लिए अगली सुनवाई तक सीट सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. न्यायालय ने को मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किए है. साथ ही यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी पद याचिकाकर्ताओं की आरक्षित श्रेणी में ही सुरक्षित रखे जाए. मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी.

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