जालोर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जूनी बाली के लेक्चरर हरसनराम देवासी को शिक्षा निदेशालय ने राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है. जांच में सामने आया कि हरसनराम ने भर्ती परीक्षाओं में अन्य अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थी बनकर परीक्षा दी, पहचान दस्तावेजों में हेरफेर किया. एक अभ्यर्थी को नौकरी दिलाने में भूमिका निभाई. विभागीय आदेश के अनुसार, हरसनराम के खिलाफ परीक्षा अधिनियम सहित कुल 9 धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज है. वह जयपुर एयरपोर्ट थाना में दर्ज एक मामले में जेल भी जा चुका है, मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है.
जांच में गंभीर आरोप साबित
निदेशालय द्वारा कराई गई विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि ट्रेनिंग के दौरान हरसनराम का आचरण, कार्य-व्यवहार और सत्यनिष्ठा शिक्षक पद के अनुरूप नहीं थी. जांच में विभागीय नियमों के उल्लंघन, अनधिकृत अनुपस्थिति, जेल जाने की जानकारी छिपाने सहित कई आरोप सिद्ध पाए गए, जिसके आधार पर उसे सेवा से बर्खास्त किया गया.
20 लाख में डमी कैंडिडेट बना
सांचौर के जोधावास निवासी हरसनराम उर्फ हरीश/हरचंद, पुत्र आईदानाराम देवासी, पढ़ाई में मेधावी रहा. उसने 3 बार NET-JRF क्वालिफाई किया, और पांच भर्ती परीक्षाएं पास कीं.
- वर्ष 2016 में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में पहली नौकरी
- उसी वर्ष द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में प्रदेश में तीसरी रैंक
- 2018 में संस्कृत लेक्चरर में चयन
- 2018 में ही हिंदी लेक्चरर भर्ती में प्रदेश में तीसरी रैंक, जूनी बाली में नियुक्ति
दूसरे की जगह दी परीक्षा
इसी दौरान 13 सितंबर 2021 को उसने दौसा जिले के महवा निवासी डालूराम मीणा की जगह एसआई भर्ती परीक्षा दी. इसके बदले 20 लाख रुपए की डील की गई थी. अगले दिन वह अपने गांव के दोस्त जैसाराम की जगह परीक्षा देने पहुंचा. पहली पारी की परीक्षा दे चुका था, लेकिन दूसरी पारी में पकड़ा गया और जेल भेजा गया.
एसओजी जांच में हुई गिरफ्तारी
सूचना मिलने पर विभाग ने उसे निलंबित कर दिया था. इधर, डालूराम मीणा को भर्ती में 1402वीं रैंक मिली और वह ट्रेनिंग पर चला गया. करीब ढाई साल बाद शिकायत के आधार पर दस्तावेज और फोटो मिलान में डमी कैंडिडेट के बैठने की पुष्टि हुई. इसके बाद फरवरी 2024 में एसओजी ने दोनों को गिरफ्तार किया.
2024 में फिर चयन, लेकिन बच नहीं पाया
हैरानी की बात यह रही कि इन सबके बावजूद वर्ष 2024 में हरसनराम का असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन हो गया, लेकिन अब विभागीय और आपराधिक मामलों के चलते उसे राजकीय सेवा से बाहर कर दिया गया है.
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