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जयपुर में बढ़ा डिजिटल टेरर का खतरा, देश के बड़े शहरों में पांचवें स्थान पर

जयपुर में साल 2026 में शुरूआत से अब तक लगभग 10 बार बम की धमकी मिल चुकी है. इसमें तीन बार विधानसभा को तो दो बार कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है.

जयपुर में बढ़ा डिजिटल टेरर का खतरा, देश के बड़े शहरों में पांचवें स्थान पर
लगातार बम की मिल रही धमकियां

Rajasthan News: राजधानी जयपुर में पिछले एक साल में 60 से ज़्यादा फर्जी बम धमकियां मिल चुकी हैं, जिनमें ज्यादातर ईमेल के ज़रिए भेजी गईं. लगातार बढ़ते मामलों की वजह से जयपुर अब डिजिटल टेरर का खतरा बढ़ता दिख रही है. वहीं देश के बड़े शहरों में डिजिटल टेरर में जयपुर का स्थान पांचवां पहुंच गया है. जयपुर में सबसे ज़्यादा निशाना , कोर्ट, विधान सभा, स्कूल, अदालतें और सरकारी इमारतें बनीं.

जयपुर में साल 2026 में शुरूआत से अब तक लगभग 10 बार बम की धमकी मिल चुकी है. इसमें तीन बार विधानसभा को तो दो बार कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है. लगातार मिल रही धमकियों के बाद साइबर पुलिस और राजस्थान पुलिस धमकी देने वाले शख़्स की तलाश में जुटी हुई है. लेकिन अभी तक पुलिस के हाथ खाली हैं. 

पुलिस को श़क है कि इन सभी धमकियों के पीछे किसी एक ही शख्स का हाथ है, क्योंकि जो भी धमकी भरे मेल आए हैं. उन सभी में एक ही बात लिखी है. 'जितना भी मुस्लिम कर्मचारी हैं उन्हें बाहर निकाला जाए'. 

कब कितनी मिली धमकियां

मई 2024 में एक ही दिन में करीब 55–56 स्कूलों को बम धमाके की चेतावनी दी गई थी. अगस्त और सितंबर 2025 में भी स्प्रिंग फील्ड स्कूल और दिल्ली पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों को धमकियां मिली. राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच को पिछले महीनों में 13 से ज़्यादा बार धमकी भेजी गई. सिर्फ दिसंबर 2025 में 5 बार कोर्ट को निशाना बनाया गया.

विदेशी सर्वर के जरिए मिल रही धमकियां

सार्वजनिक और सरकारी भवनों में भी यह सिलसिला जारी रहा. राजस्थान की सबसे सुरक्षित जगह माने जाने वाली राजस्थान विधानसभा को पिछले 12 दिनों में तीन बार धमकियां मिल चुकी हैं. इसके अलावा जयपुर एयरपोर्ट और सवाई मानसिंह स्टेडियम को भी 2025 में कई बार निशाना बनाया गया. अस्पताल और मॉल भी प्रभावित हुए. अगस्त 2024 में सीके बिड़ला अस्पताल, मोनिलक अस्पताल और पिंक स्क्वायर मॉल को धमकी भरे ईमेल मिले. जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री कार्यालय और एयरपोर्ट को एक साथ बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी. जांच में हर बार यह धमकियां फर्जी साबित हुईं और कहीं भी विस्फोटक नहीं मिला. साइबर सेल की पड़ताल में सामने आया कि ज़्यादातर ईमेल वीपीएन के ज़रिए विदेशी सर्वरों खासकर रूस से भेजे गए, ताकि भेजने वाले को ट्रेस करना मुश्किल हो सके. इसमें ओनियन नेटवर्किंग लेयर का इस्तेमाल किया गया.

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