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This Article is From Mar 17, 2026

पंचायत चुनाव में देरी से राजस्थान के 1900 करोड़ के फंड पर संकट, जूली ने सीएम भजनलाल से किया सवाल

टीकाराम जूली ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तेजी लाने की मांग करते हुए कहा कि अगर चुनाव समय पर नहीं हुए तो केंद्र से मिलने वाले करीब 1900 करोड़ रुपये के फंड रुक सकते हैं.

पंचायत चुनाव में देरी से राजस्थान के 1900 करोड़ के फंड पर संकट, जूली ने सीएम भजनलाल से किया सवाल
पंचायत चुनाव को लेकर टीकाराम जूली ने सरकार से किया सवाल

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पंचायत चुनाव और ग्रामीण विकास को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. जूली ने कहा कि सरकार न तो संविधान की परवाह कर रही है और न ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान. सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने के स्पष्ट आदेश दिए हैं, लेकिन समय सीमा नजदीक आने के बावजूद सरकार की ओर से कोई गंभीर तैयारी नजर नहीं आ रही है. नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि अगर समय पर चुनाव नहीं हुए तो केंद्र से मिलने वाले करीब 1900 करोड़ रुपये के फंड रुक सकते हैं, जिससे स्वच्छ भारत, जल जीवन मिशन और मनरेगा जैसी योजनाएं ठप हो जाएंगी.

मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से जूली का सवाल

टीकाराम जूली ने कहा कि पहले से ही डावांडोल वित्तीय स्थिति से जूझ रहे राजस्थान के लिए यह स्थिति कोढ़ में खाज जैसी साबित होगी. उन्होंने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से सवाल किया कि क्या भाजपा सरकार पंचायत चुनाव से डरकर ग्रामीण विकास को दांव पर लगा रही है. यदि केंद्र से मिलने वाला यह फंड नहीं आता है तो राज्य सरकार इसकी भरपाई कैसे करेगी. क्या पहले से कर्ज के बोझ तले दबे प्रदेश को और अधिक कर्ज में धकेलने की तैयारी की जा रही है.

जूली ने कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण स्थिति है कि जिस राजस्थान की धरती से पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई थी. आज उसी राज्य में इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने याद दिलाया कि 2 अक्टूबर 1959 को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नागौर से पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की थी, जिसे देशभर में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की मिसाल माना गया.

पंचायत चुनाव प्रक्रिया को गति देने की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से मांग की कि वह तुरंत पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को गति दे. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करे और ग्रामीण विकास से जुड़े फंड और योजनाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में देरी न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करेगी बल्कि प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों के विकास कार्यों को भी प्रभावित कर सकती है.

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