Sawai Madhopur News: राजस्थान का गौरव और बाघों का घर कहा जाने वाला रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) एक बार फिर विवादों में है. इस बार मामला किसी फर्जी टिकट का नहीं, बल्कि साक्षात 'वनराज' के अपमान और सुरक्षा में बड़ी चूक का है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने रणथंभौर वन प्रशासन की मॉनिटरिंग और वन्यजीवों के संरक्षण के दावों की पोल खोलकर रख दी है.
टाइगर सफारी या टाइगर का रास्ता जाम?
वायरल वीडियो रणथंभौर के जोन नंबर 3 का बताया जा रहा है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक टाइगर जंगल के रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आधा दर्जन से ज्यादा पर्यटक वाहनों (जिप्सियों और केंटरों) ने उसे चारों तरफ से घेर लिया है. स्थिति इतनी खराब थी कि टाइगर को चहलकदमी करने तक की जगह नहीं मिली। टाइगर वाहनों के बीच फंसा हुआ और बेहद बेबस नजर आ रहा है, जबकि वाहनों में सवार पर्यटक नियमों को ताक पर रखकर उसकी तस्वीरें और सेल्फी लेने में मशगूल हैं.
4 ड्राइवर और 4 गाइड पर हुआ ये एक्शन
वीडियो वायरल होते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया. रणथंभौर के DFO मानस सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए. जांच में दोषी पाए गए चार वाहनों के चालकों और वहां मौजूद गाइडों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है.
इन पर गिरी गाज
वन विभाग ने वाहन चालक मुरारी लाल मीणा, महेंद्र माली, तेजराज सिंह और गाइड हंसराज गुर्जर, सैयद इरशाद, प्रफुल्ल पाराशर सहित कुल 8 लोगों के टाइगर रिजर्व में प्रवेश पर आगामी आदेश तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.
क्या कहते हैं नियम?
DFO मानस सिंह के अनुसार, NTCA की गाइडलाइन साफ कहती है कि सफारी के दौरान वाहनों और टाइगर के बीच कम से कम 30 फिट की दूरी होनी चाहिए. संकरे रास्तों, घाटी या ढलान वाले इलाकों में यह दूरी 50 से 100 फिट तक होनी जरूरी है. लेकिन रणथंभौर में अक्सर 'बख्शीश' और पर्यटकों को खुश करने के चक्कर में गाइड और ड्राइवर नियमों की धज्जियां उड़ा देते हैं.
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह टाइगर को घेरना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है. अगर भीड़ और शोर से टाइगर उग्र हो जाए, तो सैलानियों की जान पर बन सकती है.
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