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कौन हैं रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल जिन्हें 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में खोज रही है ACB?

जल जीवन मिशन घोटाले के मामले में एसीबी ने पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को पकड़ में लेने के लिए लुक आउट नोटिस जारी कर दिया है.

कौन हैं रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल जिन्हें 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में खोज रही है ACB?
Retired IAS Subodh Agrawal
NDTV

राजस्थान में बीते दो दिनों से जल जीवन मिशन घोटाले को लगातार आरोपियों की धरपकड़ हो रही है. दो साल पहले जून 2023 में राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की पहल पर चर्चा में आए इस मामले की जांच एसीबी, ईडी और सीबीआई कर रही है. कथित घोटाले में 20 लोगों के नाम आ रहे हैं जिनमें कई कार्यरत और रिटायर्ड अधिकारी और इंजीनियरों के नाम शामिल हैं. एसीबी की टीम ने राजस्थान से बाहर जाकर दिल्ली, छत्तीसगढ़ और झारखंड में करीब 15 ठिकानों पर छापेमारी की और कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया. एक आरोपी को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया. इस मामले में एक बड़ा नाम एक पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल का आ रहा है. लेकिन एसीबी सुबोध अग्रवाल तक नहीं पहुंच पाई है.

सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस

एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को पकड़ में लेने के लिए लुक आउट नोटिस जारी कर दिया है. यह नोटिस सामान्यतः ऐसी परिस्थितियों में जारी किया जाता है जब आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका हो. एसीबी की टीम ने सुबोध अग्रवाल के दिल्ली और जयपुर स्थित घर पर मंगलवार (17 फरवरी) को रेड की थी. लेकिन वो घर पर नहीं मिले. साथ ही पता चला कि वह रात 9 बजे ही मोबाइल बंद करके निकल गए थे. इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं है.

कौन हैं सुबोध अग्रवाल

सुबोध अग्रवाल राजस्थान के एक पूर्व आईएएस हैं. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश में ग्वालियर के प्रतिष्ठित सिंधिया स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने देश में इंजीनियरिंग की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने महज एक साल की तैयारी कर 1988 में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास की. वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर बने और उन्हें राजस्थान कैडर मिला.

सुबोध अग्रवाल राजस्थान में 35 साल तक सेवा में रहे और अपने कार्यकाल में उन्होंने 40 से ज्यादा पदों पर जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने मेडिकल एजुकेशन से लेकर नेशनल फूड विभाग तक अहम जिम्मेदारियां संभालीं. नीति आयोग ने भी उनके काम की सराहना की थी.

अग्रवाल कई वर्षों तक जलदाय विभाग के प्रमुख भी रहे थे और इसी वजह से उनका नाम जल जीवन मिशन के कथित घोटाले से जुड़ा. आरोप है कि इस घोटाले में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर इरकॉन कंपनी के नाम पर करोड़ों के टेंडर हासिल किए गए.

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