Rajasthan News: राजस्थान के कोटा में कानून का रखवाला ही कानून तोड़ने वाला निकला. शहर के आरके पुरम थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति के साथ लूटपाट और अपहरण के मामले में दोषी पाए गए कांस्टेबल मनीष यादव को विभाग ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया. पुलिस अधीक्षक (SP) के इस कड़े एक्शन ने साफ कर दिया है कि महकमे में दोषियों के लिए कोई जगह नहीं है.
क्या था पूरा मामला?
बीती 30 जनवरी को रावतभाटा रोड पर एक सनसनीखेज वारदात हुई थी. पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह अपने साथी के साथ बाइक से जा रहा था, तभी एक कार में सवार 6 लोगों ने उन्हें रोका. इनमें से एक आरोपी पुलिस की वर्दी में था. आरोपियों ने पीड़ित का बैग छीन लिया और उसे जबरन गाड़ी में डालकर ले गए. काफी देर तक बंधक बनाए रखने और पैसों की डिमांड करने के बाद आरोपी 15 हजार नगद और कीमती सामान लूटकर फरार हो गए थे.
विभागीय जांच में खुली पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच DSP योगेश शर्मा को सौंपी गई थी. जांच में सामने आया कि वर्दी की आड़ में इस वारदात को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि कांस्टेबल मनीष यादव था. विभागीय जांच में मनीष को लापरवाही, नियम विरुद्ध कार्य और अनुशासनहीनता का दोषी पाया गया, जिसके बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया.
तस्करी के माल पर 'डाका' डालने का था प्लान?
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा हो सकता है. आरोपी कांस्टेबल को सूचना मिली थी कि पीड़ित के पास अवैध मादक पदार्थ है. इसे जब्त करने के बहाने कांस्टेबल ने अपने 5 साथियों के साथ मिलकर पीड़ित को लूटा. लेकिन जब पीड़ित को लगा कि पुलिस ने जब्त माल का कोई खुलासा नहीं किया, तो उसने सीधे SP ऑफिस पहुंचकर पोल खोल दी.
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