Rajasthan News: राजस्थान में फिट दिखने वाले युवाओं, खिलाड़ियों और यहां तक कि डॉक्टरों की अचानक हो रही मौतों (Sudden Deaths) ने प्रदेश में डर का माहौल पैदा कर दिया है. इस गंभीर मुद्दे पर गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य और केंद्र सरकार को घेरते हुए एक उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक जांच (Scientific Investigation) की मांग की है.
विधानसभा से लेकर सोशल मीडिया तक
गहलोत ने कहा कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य विधायकों ने इस मुद्दे को उठाकर समाज की वास्तविक चिंता को स्वर दिया है. उन्होंने कहा, 'फिट दिखने वाले नौजवानों और डॉक्टरों की आकस्मिक मृत्यु समाज में गहरे डर और संदेह को जन्म दे रही है. इसे महज इत्तेफाक मान लेना बड़ी भूल होगी.'
एस्ट्राजेनेका और 'लॉन्ग कोविड' का जिक्र
पूर्व मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एस्ट्राजेनेका (Covishield) के 'रेयर साइड इफेक्ट्स' (जैसे TTS) पर हो रही चर्चाओं का हवाला दिया. हालांकि ICMR की रिपोर्ट्स में अब तक सीधा संबंध नहीं मिला है, लेकिन गहलोत का तर्क है कि 'लॉन्ग कोविड' और हृदय तंत्र पर वैक्सीन के प्रभाव को लेकर दुनिया भर में शोध जारी हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस 'धुंध' को साफ करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है.
कल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री @TikaRamJullyINC व अन्य विधायकों ने प्रदेश में युवाओं और बच्चों में बढ़ते 'कार्डियक अरेस्ट' व अचानक मौतों पर जो चिंता जताई है, वह अत्यंत गंभीर है। फिट दिखने वाले नौजवानों और डॉक्टरों की ऐसी आकस्मिक मृत्यु समाज में एक गहरे डर और संदेह को जन्म दे…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) February 19, 2026
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
गहलोत ने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, '2023 के बजट में RUHS में Center for Post-Covid Rehabilitation की घोषणा की गई थी, ताकि ऐसी मौतों के पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर शोध हो सके. लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाए हैं और इन गंभीर मौतों को सामान्य बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है.
राजनीति से ऊपर उठकर जांच की मांग
गहलोत ने मांग की है कि केंद्र और राज्य सरकार राजनीति से ऊपर उठकर विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाए. उन्होंने कहा, 'जनता को यह जानने का हक है कि इन मौतों का असली कारण क्या है. भविष्य में अनमोल जिंदगियां बचाने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है.'
कल विधानसभा में क्या हुआ था?
राजस्थान विधानसभा में चिकित्सा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक घनश्याम मेहर ने 20-25 साल के युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए इसका संबंध कोरोना वैक्सीन से होने की आशंका जताई, जिस पर सदन में तीखी नोकझोंक हुई. मेहर ने कोविशील्ड पर सवाल उठाते हुए सरकार से इस विषय पर वैज्ञानिक शोध कराने की मांग की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे सबूत मांगे और भारत में बनी वैक्सीन की वैश्विक विश्वसनीयता का हवाला दिया. बहस के दौरान जब मेहर ने चंदा लेने और नकली वैक्सीन की आशंका जैसी चुटकी ली तो माहौल गरमा गया, जिसे शांत करने के लिए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सार्थक बहस की पैरवी की और अंततः आसन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ.
हालिया चर्चित मौतें, जिन्होंने प्रदेश को झकझोर दिया
- डॉ. बी.एल. यादव: हाल ही में जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर और ट्रोमा सेंटर के नोडल ऑफिसर डॉ. बी.एल. यादव का एक कॉन्फ्रेंस के दौरान कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था.
- साध्वी प्रेम बाईसा: जोधपुर की लोकप्रिय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का जनवरी 2026 के अंत में आकस्मिक निधन हो गया. उनकी मौत के बाद भी 'कार्डियक अरेस्ट' और फेफड़ों की गंभीर समस्या की बात सामने आई.
- डॉ. नरेंद्र मीणा: AIIMS के पूर्व छात्र और प्रसिद्ध डॉक्टर नरेंद्र मीणा की हाल ही में अचानक कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु हो गई. वे पूरी तरह फिट थे, जिसके बाद सोशल मीडिया पर वैक्सीन और लॉन्ग कोविड को लेकर बहस छिड़ गई.
- पुलिस महकमे में खौफ: हाल ही में जोधपुर में ASI लूणाराम और जालौर के भाद्राजून थानाधिकारी महेंद्र सिंह खींची का निधन हार्ट अटैक से हुआ. जनवरी में कांस्टेबल रावल सिंह की भी इसी तरह अचानक मृत्यु हुई.
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